-शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने अनिल गोटे की उम्मीदवारी की घोषणा की, जिससे एनसीपी के पदाधिकारी नाराज हैं
-बगावत के लिए बनी योजना, सोमवार को दिख सकता है असर
By Pawan Marathe, Newsfirst24.in
Published: October 26, 2024, 10:43 AM
Rift in Mahavikas Aghadi धुले-शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने पूर्व विधायक अनिल गोटे (Anil Gote) की उम्मीदवारी की घोषणा की है। एनसीपी के जिला अध्यक्ष रंजीत राजे भोसले (Ranjit Raje Bhosale ) ने गोटे की उम्मीदवारी पर नाराजी जतायी है।
एनसीपी शरद पवार गुट (NCP Sharad Pawar gut) के अध्यक्ष रणजित राजे भोसले बगावत कर दी है। वे सोमवार को एनसीपी पार्टी (शरद ग्रुप) और निर्दलीय नाम से दो उम्मीदवारी आवेदन दाखिल करेंगे। उन्होंने मीडिया को बताया है कि उम्मीदवारी आवेदन तैयार है। इससे आने वाले समय में महाविकास अघाड़ी को असफलता मिलने की पूरी आशंका है.
कार्यकर्ताओं में विरोध शुरू
धुले के पूर्व विधायक अनिल गोटे कल मातोश्री में उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिवसेना में शामिल हो गए। वहीं, शिवसेना ने महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार के रूप में अनिल गोटे की उम्मीदवारी की घोषणा कर दी। महाविकास अघाड़ी की ओर से ही गोटे की उम्मीदवारी का विरोध शुरू हो गया है। इसलिए आने वाले समय में अनिल गोटे की उम्मीदवारी का और विरोध होने की आशंका बनी हुई है।
पैराशूट से उतारक टिकट देने का सिलसिला
राजे भोसले गुट से जुड़े कार्यकर्ताओं में गोटे की उम्मीदवारी को लेकर जमकर नाराजगी है। उनका कहना है कि जो कार्यकर्ता शुरुआत से अपनी पार्टी के लिए वफादार रहे उन्हें छोड़कर नए-नए लोगों को पैराशूट से उतारक टिकट देने का सिलसिला चल रहा है। ऐसे में उन कार्यकर्ताओं का काम क्या पार्टी के लिए दरी-चादर उठाना ही रह गया है।
रंजीत राजे भोसले काफी समय से तैयारी कर रहे थे
एनसीपी शरद पवार गुट के अध्यक्ष रणजित राजे भोसले ने विधानसभा चुनाव में खड़े होने की काफी दिनों से तैयारी कर रहे थे। यहां तक की पूरे क्षेत्र में उनके कार्यकर्ता लोगों से उनकी समस्याओं को हल करवाने के लिए संपर्क में थे। उन्हें उम्मीद थी कि रंजीत लोगों की आम आवाज बनेंगे।
महाविकास अघाड़ी में सारे समीकरण बिगड़े
महाविकास अघाड़ी में तीन बड़ी पार्टियों का समावेश है। शरद पवार गुट, उद्धव गुट और कांग्रेस। तीनों ही पार्टियों के नेता अपने-अपने लोगों के लिए सीट दिलाना चाहते हैं। मगर बड़े नेताओं के बीच सीट बंटवारे की सीमा के चलते कई तरह के समझौते करना पड़ रहे हैं। इससे कई जगह जनता से जुड़े नेताओं से किनारा किया जा रहा है। यही सीट बंटवारे की मंजबूरी भी हैं। ऐसे में आने वाले समय में और भी बगावत देखने को मिलेगी।











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