गढ़चिरौली | रिपोर्ट: नरेश सहारे | 23 फरवरी 2025
तेंदुए की खाल की तस्करी के खिलाफ गोंदिया जिले के अर्जुनी वन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। तस्करों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने खुद को खरीददार बनाकर जाल बिछाया और 40 लाख रुपये में सौदा तय करने के बाद अपराधियों को धर-दबोचा। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार किया गया, जबकि फरार तीन अन्य आरोपियों को बाद में दबोच लिया गया।
कैसे हुआ तेंदुए की खाल का सौदा?
18 फरवरी 2025 को अर्जुनी वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि घनश्याम ब्राह्मणकर (38), निवासी सड़क अर्जुनी, तेंदुए की खाल बेचने की फिराक में है। इस सूचना के आधार पर अर्जुनी वन विभाग की टीम ने घनश्याम के घर पर दबिश दी और उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अन्य तस्करों की जानकारी दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने खुद को ग्राहक बताकर तस्करों से संपर्क किया।
सौदेबाजी के दौरान तस्करों ने खाल की कीमत 50 लाख रुपये बताई, लेकिन वन अधिकारियों ने इसे 35 लाख रुपये में खरीदने की पेशकश की। लंबी बातचीत के बाद सौदा 40 लाख रुपये में तय हुआ। जैसे ही तस्करों ने खाल दिखाई, वन विभाग की टीम ने मौके पर ही नकुल सहारे और जितेंद्र कराड़े को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें सड़क अर्जुनी वन विभाग कार्यालय ले जाया गया।
बेलगाँव में दूसरी गिरफ्तारी, छत्तीसगढ़ से भी आरोपी दबोचा
20 फरवरी 2025 को गढ़चिरौली जिले के बेलगाँव वन क्षेत्र में कोरची-कोचीनारा मार्ग पर हनुमान मंदिर के पास दो और तस्करों को तेंदुए की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया। रात में आरोपियों को बेलगाँव वन विभाग को सौंपा गया और उन्हें 21 फरवरी को देसाईगंज कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 7 दिनों की वन विभागीय हिरासत में भेज दिया गया।
इसी दौरान फरार दो आरोपी—इंदर सहारे और महेंद्र सहारे—22 फरवरी को स्वयं वन विभाग के समक्ष पेश हो गए, जबकि तीसरे आरोपी कारू टेंभुर्ने को 23 फरवरी को छत्तीसगढ़ के दंडासुर गांव से गिरफ्तार किया गया।
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क्यों सवालों के घेरे में है बेलगाँव वन विभाग?
यह मामला बेलगाँव वन क्षेत्र के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। गोंदिया जिले के अर्जुनी वन विभाग को यह सूचना थी कि बेलगाँव से तेंदुए की खाल की तस्करी हो रही है, लेकिन बेलगाँव वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं थी। यह लापरवाही या मिलीभगत का संकेत देती है।
इतना ही नहीं, बेलगाँव वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बैल तस्करी भी होती है, लेकिन वहां के वन अधिकारी अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। इस घटना के बाद बेलगाँव के अधिकारी सक्रिय होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि अब तक वे क्या कर रहे थे?
सख्त कार्रवाई की मांग
इस खुलासे के बाद अब वन विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वह तस्करी के इन गहरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करे। स्थानीय लोग और वन्यजीव प्रेमी मांग कर रहे हैं कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।











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