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गढ़चिरौली में 1.53 करोड़ का धान घोटाला: वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों की हेराफेरी, जांच में बड़े नाम फंसने की आशंका!

गढ़चिरौली में 1.53 करोड़ का धान घोटाला: वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों की हेराफेरी, जांच में बड़े नाम फंसने की आशंका!

आदिवासी विकास निगम में भारी कुप्रबंधन, 3944 क्विंटल धान और हजारों बारदाना गायब

गढ़चिरौली जिले के कुरखेड़ा तहसील अंतर्गत शिरपुर धान खरीदी केंद्र में वर्ष 2023-24 के दौरान गढ़चिरौली धान घोटाला सामने आया है। आदिवासी विकास महामंडल ने केंद्र प्रमुख मेश्राम के खिलाफ जांच शुरू की है। रिकॉर्ड के अनुसार, कुल 19860.40 क्विंटल धान की खरीदी हुई, लेकिन केवल 15916.32 क्विंटल धान की ढुलाई की गई। 3944.08 क्विंटल धान और हजारों बोरे बारदाना गायब मिला। इस हेराफेरी की कुल कीमत ₹1,53,93,080 बताई जा रही है।

 जांच में सामने आई गड़बड़ियां 

क्षेत्रीय प्रबंधक सांबरे ने किया खुलासा

देउलगांव खरीद केंद्र का दौरा करने पर क्षेत्रीय प्रबंधक श्री. जब सांबरे को स्टॉक में भारी कमी नजर आई। उन्होंने तुरंत जांच समिति गठित की। जांच में सामने आया कि न सिर्फ 3944.08 क्विंटल धान बल्कि 7398 नया और 10203 पुराना बारदाना भी गायब है, जिसकी कीमत ₹8,34,652 है।

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 घोटाले को दबाने की कोशिश, लेकिन सांबरे की सख्ती से मामला खुला

सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले को दबाने की भरपूर कोशिश हुई क्योंकि इसमें कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। लेकिन श्री. सांबरे की नियुक्ति के बाद जांच शुरू हुई। चर्चा है कि 2024-25 में भी इसी तरह की हेराफेरी हुई है।

नियमों की अनदेखी और ट्रांसपोर्ट में भी धांधली

2023-24 में धान की मिलिंग के लिए 15 मिलर्स को अनुमति दी गई थी। नियम के अनुसार धान की बोरी का वजन 40 किलो होना चाहिए था, लेकिन इसे 30 किलो कर दिया गया। तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक बावने ने इसे नजरअंदाज कर ट्रांसपोर्ट जारी रखा। इसके बाद जब सांबरे ने चार्ज लिया, तब जाकर सच्चाई सामने आई।

 क्या बोले केंद्र प्रमुख मेश्राम?

केंद्र प्रमुख मेश्राम का कहना है कि जांच जारी है और जब तक आरोप सिद्ध नहीं होते, वह कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि जितना धान खरीदा गया था, उतना ही ट्रांसपोर्ट किया गया है।

 ‘साहब’ के नाम पर वसूली की चर्चा, कौन है असली गुनहगार?

सूत्रों के मुताबिक नासिक के एक वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर करोड़ों की वसूली की गई है। “अगर पैसे नहीं दिए, तो मुकदमा दर्ज करवाऊंगा” जैसे धमकी भरे बयान देकर वसूली की गई। अब बड़ा सवाल है कि क्या इन अधिकारियों की सही तरीके से जांच होगी या फिर मामला दबा दिया जाएगा?

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