लक्ष्मी ने बताया वह कैसे बन गई थी माओवादी
उसके साथ क्या-क्या हुआ और कैसे जिंदगी काटा करती थी यह भी सब भी बताया
बचपन में माओवादियों के लिए ले जाया करती थी लक्ष्मी खाना और 2017 में माओवादियों संगठन में हुई भर्ती
महाराष्ट्र सरकार ने घोषित किया था कुल 02 लाख रुपयों का ईनाम
By naresh sahare
Published: November 11 , 2024, 09:00PM
Female Maoist Laxmi revealed many secrets in front of Gadchiroli police
माओवादी लक्ष्मी बंडे मज्जी ने शनिवार को पुलिस के सामने सरेंडर करते हुए माओवादी बनने की पूरी कहानी सुनाई। वह माओवादी बनने के बाद कैसे अपना जीवन गुजार रही थी। माओवाद से जुड़े कई राज गढ़चिरौली पुलिस के सामने बताए।
वर्ष 2005 से सरकार द्वारा घोषित आत्मसमर्पण योजना के कारण और हिंसा के जीवन से तंग आकर वरिष्ठ माओवादियों समेत कई कट्टर माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया हैं। साथ ही, आत्मसमर्पीत माओवादीयों के लिए पुलिस बल द्वारा चलाएं जाने वाले पुनर्वास योजना के चलते अबतक कुल 678 माओवादीयों ने गढचिरौली पुलिस बल के सामने आत्मसमर्पण किया हैं। 09 नवंबर 2024 को लक्ष्मी बंडे मज्जी, उम्र 42 साल, रा. कुगलेर, पो. और तह. बेद्रे, भैरमगड, जिला बीजापूर (छ.ग.) नामक महिला माओवादी ने गढचिरौली पुलिस बल और सीआरपीएफ के सामने आत्मसमर्पण किया हैं।
बचपन से भोजन ले जाने का काम करती थी
लक्ष्मी, बचपन से गांव में माओवादी बैठकों के दौरान गांववालों के साथ माओवादियों के लिए भोजन ले जाने का काम करती थी।
वर्ष 2017 से वह भामरागढ़ और इंद्रावती क्षेत्र समिति में सीएनएम (चेतना नट मंच) में सदस्य के रूप में भर्ती हुई और आज तक काम कर रही है।
दलम में रहते हुए माओवादियों को भोजन उपलब्ध कराना और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का काम किया। नक्सली महिला लक्ष्मी कई हिंसक घटनाओं में शामिल है उसकी संलिप्तता की पुष्टि की जा रही है।
इसलिए करते हैं आत्मसमर्पण
अगर कोई सदस्य दलम में रहते हुए शादी कर भी लेता है, तो भी वह स्वतंत्र वैवाहिक जीवन नहीं जी सकता। माओवादी दलम मे दिन-रात जंगल में घूमते हुए जीवन बिताना पडता हैं, अगर किसी के स्वास्थ्य को लेकर कोई समस्या हुई तो उसपर ध्यान नही दिया जाता। दलम के वरिष्ठ माओवादी द्वारा महिलाओ के साथ भेदभाव किया जाता हैं।
दलम के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि, आंदोलन एवं लोगो के लिए पैसा इकठ्ठा करना पडता हैं। वास्तव में इकठ्ठा किया गया पैसा वरिष्ठ माओवादी लोगो के विकास कार्य के लिए न करते हुए वही पैसा स्वयं के लिए इस्तेमाल करते हैं। वरिष्ठ माओवादी नेता केवल अपने फायदे के लिए गरीब आदिवासी युवाओ का इस्तेमाल करते हैं।
वरिष्ठ माओवादी नेता केवल पुलिस मुखबिर होने के संदेह पर हमारे ही भाई-बहनो की हत्या करणे को कहते हैं। मुठभेड के दौरान पुरूष माओवादी भाग जाने में सफल हो जाते हैं, पर महिला मारी जाती हैं।
गढ़चिरौली पुलिस बल द्वारा चलाए जाने वाले प्रभावी माओवादी विरोधी अभियान के कारण और सरकारने माओवादियों कों आत्मसमर्पण का सुनहरा अवसर उपलब्ध करा देने के कारण सम्मानपूवर्क जीवन बिताने के लिए वर्ष 2022 अबतक कुल 30 कट्टर माओवादीयों ने आत्मसमर्पण किया हैं।
उक्त माओवादी के आत्मसमर्पण कर मुख्याधारा में लाने की कार्यवाही
नीलोत्पल, पुलिस अधीक्षक गढचिरौली और दाओ इंजिरकान कींडो, कमांण्डट 37 बटा. सीआरपीएफ के मार्गदर्शन में पुरी की गई हैं। साथ ही पुलिस अधीक्षक गढचिरौली श्री. नीलोत्पल ने आवाहन किया हैं की, पुलिस बल, विकास कार्यो मे बाधा डालने वाले माओवादीयो के खिलाफ प्रभावी कारवाई करने के लिए सक्षम है।
वही गढचिरौली पुलिस बल उन लोगो की मदद करेगी जो विकास के मुख्य धारा मे शामिल होने और लोकतंत्र में सम्मान जनक जीवन जीने के लिए इच्छुक है, उन्हे गढचिरौली पुलिस बल पूरा सहयोग करेगा। इसलिए राह भटके हुए माओवादी मुख्यधारा मे शामिल होकर शांतीपूवर्क जीवन व्यातीत करें।











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