By election desk , Newsfirst24.in
Published: November 11 , 2024, 12:37 PM
| o जनता किसी एक को नहीं दे रही है बहुमत
o महाराष्ट्र में हर बड़ी पार्टी ने सरकार बनाने के लिए अपनी विचारधारा से विपरीत व्यवहार किया, इसलिए जनता हर किसी से नाराज o तीन बड़ी पार्टियों के बागियों ने इस बार बिगाड़ दिया चुनावी रिजल्ट |

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में आखिर कौन सी पार्टी जीतने वाली है? यह सवाल हर किसी के जुबान पर बना हुआ है। इसी सवाल का जवाब तलाशने newsfirst24.in ने प्रयास किया है। इसके लिए कई रिपोर्टर ने महाराष्ट्र की राजनीति में पकड़ रखने वाले विशेषज्ञों से बात कर निचोड़ निकालने का प्रयास किया।
इसमें कई फैक्ट सामने आए। जिससे यही साबित हुआ कि इस बार महाराष्ट्र के 2024 विधानसभा चुनाव में किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिल रहा है। एक बार फिर खिचड़ी सरकार बनने के संकेत मिल रहे हैं। खिचड़ी सरकार का भी कोई तय फार्मूला नहीं है। यह बात भी सभी पार्टियां अच्छे से जानती भी हैं। इस चुनाव पर किस फैक्टर का कितना असर पड़ रहा है आइए जानते हैं।
एक नजर महाराष्ट्र की सीटों पर

महाराष्ट्र में भाजपा ने 148, कांग्रेस ने 102 प्रत्याशी, शिंदे ने 80, अजित ने 53 उम्मीदवार उतारे हैं, उद्धव गुट के 89, शरद गुट के 87 कैंडिडेट हैं। महायुति में 148 उम्मीदवारों के साथ भाजपा और MVA में 103 के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। दोनों पार्टियां 2019 के विधानसभा चुनाव से कम सीटों पर लड़ रही हैं। भाजपा ने पिछली बार 164 तो कांग्रेस ने 147 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे।
जनता नाराज है क्योंकि सभी पार्टियों ने अपनी विचारधारा के विपरीत काम किया
इस सर्वे में सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आई कि महाराष्ट्र में सभी चार बड़ी पाटिर्यों से जनता नाराज हैं। इसमें भाजपा, कांग्रेस राकांपा, और शिवसेना शामिल है। दरअसल, कांग्रेस हमेशा से शिवसेना की कट्टर हिंदू आइडियोलॉजी के कारण विरोध करती आई है। मगर मौका पड़ने पर शिवसेना के साथ सरकार बना ली।

इसी तरह राकांपा शरद पवार के परिवार की पार्टी के रूप में जानी जाती है। शरद पवार को जब पार्टी की विरासत सौंपने का समय आया तो उन्होंने पार्टी के सबसे मजबूत दावेदार अजीत पवार को छोड़कर अपनी बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी की बागडोर सौंप दी। जिससे परिवार खंडित हो गया और पार्टी भी दो भागों में बंट गई।
लोगों के बीच यही मैसेज गया कि परिवारवाद के आगे कोई उसूल मायने नहीं रखते। इसी तरह भाजपा ने रातों-रात सरकार बनाने के लिए अजित पवार से हाथ मिलाया जबकि इसके पहले तक उनके भ्रष्टाचार को पानी पी-पी कर कोस रहे थे। वहीं भाजपा का मुख्यमंत्री बनाने के लिए शिवसेना से पारंपरिक गठबंधन तोड़ दिया।
इस पर भी लोगों की नाराजगी है। दूसरी तरफ शिवसेना ने भी सत्ता पाने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाया जो पहले धुर विरोधी थे। वोटरों की यह नाराजगी लोकसभा चुनाव में भी नजर आई।
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शिवसेना–राकांपा को तोड़ना भी जनता को पसंद नहीं आया

कहते हैं राजनीति में कुछ भी जायज है। मगर जनता एक विचारधारा पर वोट देती आई है। इस बार पार्टियों की विचारधार में सब घाल-मेल हो गया। लोग मानते हैं कि भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा उद्धव ठाकरे की शिवसेना को तोड़कर शिंदे गुट में बांट देना और राकांपा शरद पवार की पार्टी को तोड़कर अजीत पवार में बांट देना लोगों को पचा नहीं है।
भले ही भाजपा इसको संबंधित पार्टियों की आपसी कलह बताकर अपना कोई लेना-देना नहीं
बताती रही हो, मगर सभी जानते हैं कि इस कलह के पीछे उनका ही दिमाग काम कर रहा है। जिसको लेकर भी नाराजगी बनी हुई है।
बागियों ने सभी पार्टियों का बिगाड़ा गणित
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सभी पार्टियों के चुनावी समीकरण बिगड़ गए। जहां पहले भाजपा और शिवसेना एक साथ चुनाव लड़ते थे अब शिवसेना के दो गुट होकर एक शिंदे गुट भाजपा के साथ है तो दूसरा उद्धव गुट कांग्रेस और राकांपा के साथ है। इसी तरह राकांपा भी दो गुटों में बंट गया एक भाजपा के साथ तो दूसरा कांग्रेस और शिवसेना के साथ है।
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ऐसे में एक तो पार्टियों के पारंपरिक वोटर कनफ्यूज हो रहे कि इस बार वे किस गुट को असली और किस गुट को नकली माने। और सही कौन, गलत कौन है? दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी और महायुति में शामिल पार्टियों को टिकट देने के चलते कई पार्टियों में बहुत ही सीमित टिकटों का बंटवारा हुआ।
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जिसके चलते पार्टी सभी पार्टियों में सालों से टिकट की आस लगाए बैठे पुराने कार्यकर्ताओं ने बगावत कर दी। ऐसे में एक तो पहले ही पार्टियों के टूटने से वोटर बंट गए थे दूसरी तरफ बगावती कैंडिडेटस ने और मुश्किलें बढ़ा दीं है। बीजेपी ने 37 सीटों पर बगावत करने वाले 40 बागियों पर कार्रवाई की है।
बीजेपी ने इन बागियों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसी तरह शिवसेना 49 सीटों पर और राकांपा 38 सीटों पर एक-दूसरे के सामने मैदान में हैं। ये 87 सीटों पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे, शरद पवार तथा अजीत पवार एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं।
सबसे बड़े सवाल का जवाब आखिर जीत कौन रहा है
अभी तक आपने पढ़ा है कि किस तरह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में पार्टियों का गणित कैसे बिगड़ा है। ऐसे में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में कौन जीत रहा है?
इसके सवाल का जवाब यही निकलकर सामने आया कि इस बार कोई भी पार्टी अपने दम पर बहुमत साबित नहीं कर पा रही है। ऐसे में कोई भी एक पार्टी नहीं जीत रही है। अलग-अलग पार्टियों और उनके अलग-अलग गुट के आधार पर कैंडिडेट जीत रहे हैं। जिनको मिलाकर एक बार फिर महाराष्ट्र में खिचड़ी सरकार बनने वाली है।
और कोई चौंकाने वाली बात नहीं कि इस बार सरकार को बनाने में महायुति और महाविकास अघाड़ी नए समीकरण सामने आएंगे, जो अप्रत्याशित होंगे।
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महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें
महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं, जिसमें बहुमत के लिए 145 सीटों पर जीतना अनिवार्य है। 2019 के चुनाव में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54, कांग्रेस को 44 और अन्य को 29 सीटें मिली थीं। 9 करोड़ 63 लाख वोटर हैं जो महाराष्ट्र का भविष्य तय करेंगे।
महाराष्ट्र में विधानसभा 2024 से जुड़े प्रश्न
महाराष्ट्र में विधानसभा 2024 में वोटिंग किस दिन है?
महाराष्ट्र में विधानसभा 2024 में 20 नवंबर को वोटिंग होगी।
महाराष्ट्र में विधानसभा 2024 में कितनी सीटों पर चुनाव हो रहा है?
महाराष्ट्र में विधानसभा 2024 में 288 सीटों पर चुनाव हो रहा है।
महाराष्ट्र में विधानसभा 2024 में कौन सी पार्टी जीत रही है?
महाराष्ट्र विधानसभा 2024 चुनाव में इस बार किसी एक पार्टी का जीतना तय नहीं है।
महाराष्ट्र में विधानसभा 2024 का रिजल्ट कब आएगा?
महाराष्ट्र में विधानसभा 2024 में 23 नवंबर को काउंटिंग है उसी दिन रिजल्ट सामने आ जाएगा।
महाराष्ट्र में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल कब खत्म हो रहा है?
महाराष्ट्र में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो रहा है।











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