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सुप्रीम कोर्ट ने ‘बुल्डोज़र जस्टिस’ पर कहा: घर सालों की मेहनत से बनता है, उसे गिराना सही नहीं है

सुप्रीम कोर्ट ने 'बुल्डोज़र जस्टिस' पर कहा: घर सालों की मेहनत से बनता है, उसे गिराना सही नहीं है

‘बुल्डोज़र जस्टिस’ पर बुधवार को  बड़ा फैसला आया

Supreme Court said on ‘Bulldozer Justice’: A house is built with years of hard work, it is not right to demolish it

By Delhi desk , Newsfirst24.in

Published: November 13 , 2024, 04:47 PM

सुप्रीम कोर्ट ने 'बुल्डोज़र जस्टिस' पर कहा: घर सालों की मेहनत से बनता है, उसे गिराना सही नहीं है

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ‘बुल्डोज़र जस्टिस’ पर बुधवार को एक बड़ा फैसला देते हुआ कहा कि किसी का भी घर बड़ी मेहनत के बाद बनता है। ऐसे में किसी भी मामले में दोष सिद्ध होने पर उसका घर गिराना ठीक नहीं है। इस ऐतिहासिक फैसले की देशभर में तारीफ हो रही है तो दूसरी तरफ यूपी में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को इससे बड़ा झटका लगता नजर आ रहा है। यूपी की तर्ज पर एमपी और भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी भी बुल्डोजर जिस्टिस का चलन बढ़ गया था।

कानून के शासन पर प्रहार होगा

बुलडोजर जस्टिस की प्रवृत्ति के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 नवंबर) को कहा कि शासन केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति के घर नहीं गिरा सकती कि वह किसी अपराध में आरोपी या दोषी है। कार्यपालिका किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा सकती। केवल आरोप के आधार पर यदि कार्यपालिका व्यक्ति की संपत्ति को ध्वस्त करती है तो यह कानून के शासन पर प्रहार होगा।

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शासन खुद न्यायाधीश नहीं बन सकता

शासन न्यायाधीश बनकर आरोपी व्यक्ति की संपत्ति को ध्वस्त नहीं कर सकती। बुलडोजर द्वारा इमारत को ध्वस्त करने का भयावह दृश्य अराजकता की याद दिलाता है। संवैधानिक लोकतंत्र में इस तरह की मनमानी कार्रवाई के लिए कोई जगह नहीं है। इस तरह की कार्रवाई कानून के सख्त हाथ से की जानी चाहिए। हमारे संवैधानिक लोकाचार इस तरह के कानून की अनुमति नहीं देते।”

बुलडोजर ऐक्शन में गलती मिली तो सैलरी से जुर्माना भरेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बिना कारण बताओ नोटिस के बुलडोजर ऐक्शन की अनुमति नहीं है। ऐसा करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से जुर्माना वसूला जाएगा। नोटिस रजिस्टर्ड डाक से भेजा जाना चाहिए तथा ध्वस्त किए जाने वाली इमारत के बुलडोजर ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है और देश भर के लिए गाइडलाइंस तय कर दी है।

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मूल अधिकार का उल्लंघन

अदालत ने बुधवार को इस संबंध में फैसला देते हुए कहा कि किसी का भी घर सालों की मेहनत से बनता है और हर किसी का सपना होता है। इसलिए किसी के घर को आरोपी या दोषी होने पर ढहा देना गलता है और मूल अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने आर्टिकल 142 के तहत व्यवस्था देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए नियम तय कर दिए हैं। देश के किसी भी हिस्से में बुलडोजर ऐक्शन से पहले उनका पालन करना होगा।

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