भाजपा महागठबंधन के पास बहुमत के बावजूद भी स्थिति असमंजस
By Arvind Jadhav, Newsfirst24.in
Published: December13, 2024, 12:52 PM

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भले ही महागठबंधन को विपक्ष की भाषा में कहा जाए तो “शैतानी” बहुमत मिला है, लेकिन इसके बावजूद सन्नाटा का माहौल क्यों है। इसका कारण यह है कि मंत्रिमंडल के गठन के पहले हर दिन मंत्री पद को लेकर बहस चल रही है, लेकिन आए दिन होने वाली चर्चाओं से कोई अंतिम फैसला नहीं निकल पाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों पार्टियों के बीच सुलह तो दिल्ली से हो रही है, लेकिन माना जा रहा है कि मंत्री पद को लेकर कोई ठोस फैसला अभीतक नहीं हुआ है। इसके अलावा जहां देवेन्द्र फड़णवीस और अजित पवार ने दिल्ली की चर्चा में हिस्सा लिया, लेकिन एकनाथ शिंदे इस चर्चा से दूर रहे। वहीं राजनीतिक जानकार अनुमान लगाए हैं कि क्या यह विवाद मंत्रिमंडल के गठन के पहले कम से कम 14 तारीख तक सुलझ जाएगा या और बढ़ेगा।
मंत्रिमंडल के गठन में किसे मिलेगा मंत्री पद और किसे मिलेगा बैठना होगा खाली हाथ ?

बीजेपी के खेमे से खबर आ रही है कि मंत्रिमंडल के गठन में सरकार में उन मंत्रियों को दोबारा मौका नहीं देना चाहते जो विवादास्पद रूप से दागी हैं और जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
हालांकि, जिस तरह से मीडिया में खबरें आ रही हैं कि एकनाथ शिंदे के कुछ मंत्रियों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा, उससे शिवसेना में ये डर बढ़ गया है। मंत्रिमंडल के गठन में चूंकि मंत्री पद का बंटवारा संख्या के आधार पर होगा, लेकिन कम सीटे लड़कर विजय का औसत अच्छा होने कारण और पहले दिन से ही देवेन्द्र फडणवीस को समर्थन और सहयोग देने वाला एनसीपी अजित पवार गुट भी कुछ ज्यादा मिलने की उम्मीद पर बैठा है। बीजेपी की शानदार सफलता में कुछ उम्मीदवारों को लाखों वोट मिलने से बीजेपी में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है कि क्या ज्यादातर वोट पाने वालों मंत्री पद मिलेगा या नही।
महागठबंधन पर लगाम रखने की तैयारी में देवेंद्र फड़णवीस

जिस पार्टी के पास बहुमत होगा उसे मुख्यमंत्री पद मिलना स्वाभाविक था, लेकिन पिछली सरकार के मानदंडों और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए चुनाव के कारण, शिवसेना गुट मुख्यमंत्री पद पर जोर दे रहा था। अब यह साफ हो रहा है कि केंद्र से एकनाथ शिंदे के पक्ष में लगाए जाने के कारण भी मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में देरी हुई है। एकनाथ शिंदे को भाजपा पार्टी के असंतुष्ट नेतागण से मिल रहे समर्थन की ओर देवेंद्र फड़णवीस ने अपना मोर्चा मोड़ लिया है।
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इसके चलते, देवेन्द्र फड़णवीस पहले मुख्यमंत्री पद अब इतना शिंदे की मांग गृहमंत्री पद को लेकर दिल्ली से गृहमंत्री पद भाजपा के ही पास रखने के प्रयास जारी है साथ ही एकनाथ शिंदे के संकटमोचक मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के प्रमुख मंगेश चिवटे, को कोष अध्यक्षता से दूर कर अपनी मंशा के संकेत दिए है।











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