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कुछ ने खुलकर संगठन के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली
By MUMBAI BUREAU, Newsfirst24.in
Published: December17 , 2024, 02:47 PM
Signs of rebellion in Mahayuti: Many leaders left the winter session angry at not getting a place in the cabinet
नागपुर। महायुति में तीन दलों के के कुछ नेताओं को कैबिनेट में जगह नहीं मिलने पर बगावत के संकेत दिए हैं। कुछ तो खुलकर पार्टी के खिलाफ बोल रहे हैं। कुछ महाराष्ट्र का नागपुर में आयाजित शीत सत्र बीच में ही छोड़कर चले गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी दिनों में सरकार चलाना आसान नहीं होगा। यह बागी नई परेशानी खड़ी कर सकते हैं।
कई लोगों के दु:ख खुलकर सामने आए हैं
महाराष्ट्र में रविवार (15 दिसंबर) को महायुति की नई कैबिनेट के मंत्रियों ने शपथ ग्रहण हो गई। इसमें तीनां दलों के 39 विधायकों को जगह मिली है। कई दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्हें जगह नहीं मिली। जबकि इसके लिए से लंबे समय से लाबिंग कर रहे थे। अपने सपने चकनाचूर होने के बाद कई लोगों के दु:ख खुलकर सामने आए हैं। इसमें शिंदे की शिवसेना भी शामिल हैं। महायुति के मंत्रीमंडल में कई नेताओं ने मंत्री पद न मिलने पर पार्टी की आलोचना की है। इसको लेकर एकनाथ शिंदे बागियों पर भड़के हुए हैं।
इन्होंने नाराज होकर शीत-सत्र ही छोड़ दिया

तानाजी सावंत कैबिनेट में जगह नहीं मिलने इतने नाराज हैं कि उन्होंने अपनी नाराजगी कुछ नेताओं के सामने प्रगट करने के बाद पुणे चले गए। इसी तरह विजय शिवतारे ने कहा कि मेरे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया है। अगर ढाई साल बाद मुझे मंत्री बनाया जाता है, तब भी मैं मंत्री नहीं बनूंगा।
निर्दलीय विधायक रवि राणा जिन्होंने चुनाव के पहले और चुनाव के बाद भाजपा और महायुति के पक्ष में खूब महौल बनाने का प्रयास किया, उन्हें भी निराशा हाथ लगी। यहां तक की देवेंद्र फडणवीस के सीएम बनने पर वह बहुत भावुक हो गईं थी। अब शीत सत्र छोड़कर अमरावती चली गईं। महायुति में शामिल इससे पहले शिंदे गुट के भंडारा से विधायक नरेंद्र भोंडेकर ने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने पर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
विधायकों की नाराजगी पर शिंदे ने कहा धैर्य रखें
महाराष्ट्र में महायुति की कैबिनेट विस्तार के बाद एकनाथ शिंदे ने नाराज नेताओं की बातों और उनसे जुड़ी खबरें सुनने के बाद उन्हें धैर्य रखने की सलाह दी है। इसी कारण से ढाई साल का फार्मूला भी लाया गया है। उनके बारे में भविष्य में विचार करने को कहा है।
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दीपक केसरकर भी नाराज, खुलकर नाराजगी व्यक्त करने से बच रहे हैं

महायुति में शामिल शिंदे गुट के सबसे भरोसेमंद दीपक केसरकर को कैबिनेट में दोबारा जगह नहीं दी गई है। इसको लेकर भी वे नाराज हैं। हालांकि, केसरकर ने अपनी नाराजगी खुलकर मीडिया या नेताओें के बीच नहीं रखी। उनके इस तरह के व्यवहार की एकनाथ शिंदे ने भी सराहना की है। उनका उदाहरण देकर असंतुष्ट विधायकों को समझाने की कोशिश की।
क्यों नहीं मिल केसरकर को जगह
शिवसेना के एक भी मुंबई विधायक को महायुति की कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया है। इसमें दीपक केसरकर भी हैं।, उनका प्रदर्शन इतना शानदार नहीं रहा. उसका असर लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर भी देखने को मिला। इसलिए केसरकर को इस साल कैबिनेट से बाहर रखा गया है।
भुजबल ने खुलकर दिए बगावत के संकेत

महाराष्ट्र की महायुति सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने से नाराज वरिष्ठ एनसीपी नेता छगन भुजबल ने दावा किया कि उनको आठ दिन पहले राज्यसभा जाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन मैंने उसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने भविष्य को लेकर कहा कि जहां नहीं चैना, वहां नहीं रहना।
भुजबल ने राज्य में पिछले महीने हुए विधानसभा चुनाव में येवला सीट से जीत हासिल की है। भुजबल ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा का प्रस्ताव इसलिए अस्वीकार किया, क्योंकि यह उनके विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ धोखा होगा। पहले जब मैं राज्यसभा जाना चाहता था, तो मुझे कहा गया कि आपको विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए। अब मुझे आठ दिन पहले राज्यसभा जाने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे मैंने अस्वीकार कर दिया। मैं एक-दो साल बाद राज्यसभा जाना पसंद करूंगा, लेकिन अभी नहीं।
उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल जगह न मिलने के बाद मैंने एनसीपी प्रमुख और डिप्टी सीएम अजित पवार से बात नहीं की है। उन्होंने दावा किया कि उनको कैबिनेट से बाहर इसलिए रखा गया क्योंकि उन्होंने मराठा आरक्षण की मांग कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे का विरोध किया था। भुजबल ने कहा कि जब मराठा कार्यकर्ता आरक्षण की मांग कर रहे थे तो मैं अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ खड़ा था। लड़की बहन योजना और ओबीसी ने ही महायुति को चुनाव में जीत दिलाई है।
जिन्हें हटाया गया वह भी नाराज
महायुति की पिछली सरकार से 10 पूर्व मंत्रियों को हटाकर 16 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। इसमें पूर्व मंत्री छगन भुजबल, दिलीप वाल्से, सुधीर मुंनगटीवार और विजय कुमार गावित को कैबिनेट में जगह नहीं दी गई है। यह सभी भी नाराज चल रहे हैं।











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