By NAGPUR BUREAU, Newsfirst24.in
Published: December 19, 2024, 06:16 PM

फाइल फोटो
नागपुर। एक बार फिर अजीत पवार संघ मुख्यालय मे बुलावे पर नहीं पहुंचे। गुरुवार को संघ मुख्यालय में बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक केशव बलीराम हेडगेवार की समाधि पर नमन करने पहुंचे थे।
मगर डिप्टी सीएम अजीत पवार नहीं पहुंचे। यह तीसरा मौका है जब पवार संघ मुख्यालय में बुलावे के बाद भी नहीं पहुंचे। इससे उनकी अलग विचारधारा को समझा जा सकता है।
पवार संघ के खिलाफ अपनी विचारधारा को अपनाए हुए हैं
महाराष्ट्र में महायुति की सरकार में शामिल अजित पवार संघ के खिलाफ अपनी अलग विचारधारा अपनाए हुए हैं। गुरुवार को भी यही बात खुलकर सामने आई। जब गुरुवार को नवनियुक्त विधायक और मंत्रियों को नागपुर स्थित संघ के रेशमीबाग मुख्यालय आने का आमंत्रण दिया गया था।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे शामिल हुए, लेकिन अजित पवार नहीं पहुंचे। हालांकि ऐसा नहीं कि वह नागपुर से बार हों। गुरुवार को वह नागपुर में ही मौजूद थे।
अजित गुट का एक विधायक पहुंचा मगर उन्होंने कहा मैं तो निजी श्रद्धा के कारण आया
अजित भले ही आरएसएस मुख्यालय नहीं गए, लेकिन उनके एक विधायक राजू कारेमोरे जरूर कार्यक्रम में शामिल हुए। तुमसर से विधायक कारेमोरे से जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उनका कहना था कि मैं यहां पार्टी की तरफ से नहीं आया हूं। मैं यहां व्यक्तिगत श्रद्धा की वजह से आया हूं।
अजीत पवार ने यहां आने या नहीं जाने का कोई आदेश नहीं दिया
अजीत पवार ने अपने विधायकों को संघ मुख्यालय जाने के लिए या नहीं जाने के लिए कोई आदेश नहीं दिया। इस मामले में चुप्पी साध ली। उनके विधायकों ने भी अजीत का रुख भांपते हुए संघ मुख्यालय नहीं जाना ही बेहतर समझा।
यह बात उनकी पार्टी के विधायक कारेमोरे ने स्वीकारी। उनका कहना था कि यहां आने और न आने के लिए कोई भी आदेश नहीं दिया गया था।
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तीसरी बार जब वह संघ के कार्यक्रम में शामिल होने से बचे
जून 2023 में अजित पवार एनडीए में शामिल हुए थे। उसके बाद दिसंबर का शीतकालीन सत्र नागपुर में आयोजित किया गया था। उस वक्त भी संघ मुख्यालय में बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। अजित उस कार्यक्रम में नहीं गए थे।
इस साल लोकसभा में हार के बाद एकनाथ शिंदे की सरकार ने लाडकी बहिन योजना की शुरुआत की थी. जब सरकार के सभी बड़े नेता नागपुर आए थे, तब आरएसएस मुख्यालय गए थे, लेकिन अजित उस मौके पर भी संघ मुख्यालय नहीं गए।











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