By रवि आर्य, Newsfirst24.in
Published: December 28, 2024, 01:49 PM
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दलम में दो वक्त की रोटी नसीब नहीं थी , 7 लाख के इनामी नक्सली देवा ने किया आत्मसमर्पण
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माओवादी संगठन में हो रहे उत्पीड़न और यातना से तंग आकर
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2014 में पामेड दलम (दक्षिण बस्तर) में भर्ती होकर बंदूक उठा ली

गोंदिया। बच्चपन से दलम में शामिल होने वाले देवा ने 27 साल की उम्र तक नक्लसली गतिविधियों और उसकी जिंदगी को बड़ी बारीकी से देखा। उसने जो अपनी आपबीती सुनाई वह दिल दहला देने वाली है। कभी खून तो कभी धमाकों के बीच जंगल की जिंदगी कैसे होती है। उनका अनुभव सुनकर पुलिस और अधिकारी भी सहम गए।
महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गोंदिया जिले में नक्सली विचारधारा को त्याग कर 7 लाख के इनामी नक्सली ने जिलाधिकारी प्रजीत नायर, जिला पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे, अपर पुलिस अधीक्षक नित्यानंद झा के समक्ष 26 दिसंबर को आत्म समर्पण कर दिया।
बचपन से ही नक्सल दलम में शामिल हो गया

तांडा दलम, मलाजखंड दलम व पामेड प्लाटून-9/ प्लाटून पार्टी कमेटी के मेंबर देवा उर्फ अर्जुन उर्फ राकेश सुमडो मुडाम (27 निवासी गुंडम सुटबाईपारा पो. बासागुडा त. उसुर जि. बिजापुर छ.ग) यह बचपन से ही नक्सल दलम में शामिल हो गया था लेकिन माओवादी संगठन में हो रहे उत्पीड़न और यातना से तंग आकर उसने जिला पुलिस बल के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया।
माओवादियों के भ्रम और झांसे में फंसकर उठाई बंदूक
अति दुर्गम नक्सल प्रभावित बिजापुर निवासी आत्मसमर्पित नक्सली देवा उर्फ अर्जुन के गांव में गणवेशधारी हथियारबंद नक्सलियों का आना-जाना लगा रहता था। माओवादियों के भ्रम व झांसे में फंसकर वह बचपन से ही नक्सली आंदोलन में शामिल हो गया और उसने बाल संगठन में कार्य किया। तत्पश्चात वर्ष 2014 में पामेड दलम (दक्षिण बस्तर) जि. बिजापुर में भर्ती हुऐ और हाथ में हथियार ( बंदूक ) उठा ली ।
तांडा दलम और मलाजखंड दलम में निभाई सक्रिय

पामेड दलम में 6 माह तक काम करने के बाद 2014 के अंत में उसे अबुझमाड एरिया में ढ़ाई माह की ट्रेनिंग ली , ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 2015 में उसे माओवादियों के इलाके बस्तर से एम.एम.सी. (महाराष्ट्र- मध्यप्रदेश- छत्तीसगढ़) जोन भेजा गया, शुरूवात में सदस्य के रुप में कार्यरत रहने के बाद 2015-16 में तांडा दलम तथा 2016-17 में मलाजखंड दलम में उसने सक्रियता निभाई, इस दौरान वह मलाजखंड क्षेत्र के डी.वी.सी.एम. चंदू उर्फ देवचंद के बॉडीगार्ड के तौर पर काम करता था।
2018 में उसे वापस दक्षिण बस्तर इलाके में भेज दिया गया जहां सितंबर 2019 तक उसने पामेड प्लाटून क्र. 9 में प्लाटून दलम सदस्य के रुप में काम किया।
पुलिस- नक्सली मुठभेड़ के 12 मामलों में रहा है शामिल
आत्मसमर्पित नक्सली देवा यह वर्ष 2014 से 2019 तक नक्सली संगठन में काम करते हुए टिपागड़ फायरिंग (गड़चिरोली), झिलमिली काशीबहरा बकरकट्टा फायरिंग (राजनंदगांव), झिलमिली फारेस्ट कर्मचारी से मारपीट व चौकी जलाना, हत्तीगुडा घोडापाठ फायरिंग (राजनंदगांव), किस्टाराम ब्लास्ट (सुकमा), पामेड फायरिंग (बिजापुर) आदि एक दर्जन से अधिक मुठभेड़ में शामिल रहा है ।
माओवादी नेताओं के चेहरे से हटा नकाब तो नक्सली विचारधारा से किया किनारा
सीनियर कैडर की मनमानी, फंड के नाम पर पैसों की लूट, झूठी लक्ष्य नीतियां, धोखे, प्रलोभन तथा हिंसा में माओवादी नेताओं का असली चेहरा सामने आने के बाद देवा ने नक्सली विचारधारा से किनारा करते हुए आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।
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ऊगाही का पैसा दलम के कल्याण पर नहीं स्वयं पर खर्च होता है
आत्मसमर्पित नक्सली देवा ने कहा कि, माओवादी नेता और संगठन के वरिष्ठ कैडर जो ऊगाही से पैसा (फंड) इकट्ठा करते है उसे दलम के कल्याण पर खर्च ना करते हुए खुद स्वयं पर खर्च करते है , पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदारों पर कोई भी अड़चन आने पर किसी भी प्रकार की कोई आर्थिक मदद नहीं की जाती।
दलम में शामिल सदस्यों को दो टाइम का नियमित भरपेट भोजन नसीब नहीं होता, जंगल का जीवन बेहद कठिन है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
पुलिस सबसे ‘ करीबी दुश्मन ‘ हर वक्त जान हथेली पर
सुरक्षा बल द्वारा सतत नक्सल विरोधी अभियान के तहत जंगल में कोबिंग ऑपरेशन चलाया जाता है जिससे हमेशा पुलिस की गोली और मौत का डर बना रहता है वरिष्ठ कैडर पुलिस खबरी के संशय में निरपराधों, आदिवासी बंधुओं और सामान्य नागरिकों को खत्म करने हेतु कहते हैं। ‘नक्सलवाद उन्मूलन नीति’ के तहत महाराष्ट्र शासन की आत्मसमर्पण योजना से प्रभावित होकर ही उसने आत्मसमर्पण कर दिया।











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