संगम पर सनातन की शक्ति का भव्य प्रदर्शन
By प्रेम उपाध्याय, Newsfirst24.in
Published: December 10, 2025, 11:00 PM

प्रयागराज। प्राचीन परंपराओं और अद्भुत संस्कृति की भव्यता को प्रदर्शित करते हुए, महाकुंभ 2025 में पहली बार वैष्णव परंपरा के तीनों अनियों—निर्मोही, निर्वाणी, और दिगंबर अखाड़ों—ने एक साथ छावनी प्रवेश में अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन किया। यह ऐतिहासिक छावनी प्रवेश शोभायात्रा सनातन धर्म की दिव्यता और भव्यता का जीता-जागता उदाहरण बनी।
संस्कृति की शक्ति का प्रदर्शन
तीनों अखाड़ों के संतों और महंतों ने तलवार, भाला और अन्य पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा के दौरान संतों पर पुष्प वर्षा कर संगम नगरी की धरती को भक्तिमय कर दिया गया। ऊंट, घोड़े, रथ, बग्घियां, बैंड-बाजे और सुंदर झांकियों ने इस शोभायात्रा को और भी दिव्य और आकर्षक बना दिया।
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पहली बार एकता का अद्भुत संगम
पहली बार, वैष्णव परंपरा के तीनों अखाड़ों ने सामूहिक रूप से छावनी प्रवेश किया। यह संभव हुआ क्योंकि निर्मोही अनि अखाड़े की पहल पर हुई बैठकों में तीनों अखाड़ों के बीच सामूहिक तैयारी के लिए एक समिति बनाई गई। इससे छावनी प्रवेश की भव्यता और एकता को नया आयाम मिला।
सनातन का संदेश:

यह शोभायात्रा केवल भव्यता का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह सनातन धर्म की एकता, शक्ति और आध्यात्मिकता का प्रतीक बनकर उभरी। यह संदेश दिया गया कि सनातन धर्म की जड़ें कितनी गहरी और मजबूत हैं।
“ऐतिहासिक छावनी प्रवेश ने हमें यह दिखाया कि सनातन धर्म केवल परंपराओं का पालन नहीं, बल्कि शक्ति और एकता का प्रतीक भी है। ऊंट, घोड़े, बग्घियों और झांकियों ने इस आयोजन को अलौकिक बना दिया। तीनों अखाड़ों की सामूहिकता ने एक नया अध्याय लिखा है। यह क्षण हर भक्त के लिए गर्व का विषय है।”
महाकुंभ 2025 का यह ऐतिहासिक क्षण, सनातन संस्कृति के गौरव और उसकी शक्ति का प्रमाण है।
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