By दुर्वास रोकडे, Newsfirst24.in
Published: December 13 , 2025, 03:23 PM

अमरावती। महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अंजनगांव सुर्जी में प्रशासनिक घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय तहसील कार्यालय पर 98% फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को जारी करने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला न केवल सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है, बल्कि सामाजिक संतुलन को भी बिगाड़ने वाला है।
बांग्लादेशी घुसपैठ का खतरनाक नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, 60,000 की जनसंख्या वाले अंजनगांव में 1,400 जन्म प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन किए गए थे, जिनमें से 98% प्रमाणपत्र अवैध रूप से बांग्लादेशी नागरिकों को दिए गए। इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए नागरिकता, सरकारी योजनाओं और यहां तक कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का प्रयास हो सकता है।
हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के बीच घुसपैठ का खेल
बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के बीच, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक भारत में घुसपैठ कर महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में बस रहे हैं। यह न केवल स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि सरकारी संसाधनों पर भी भारी बोझ डालता है।
फर्जी दस्तावेज बनाने में करोड़ों का दुरुपयोग

माना जा रहा है कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के लिए 319 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ये पैसे अवैध गतिविधियों के लिए बांग्लादेश से आए 2200 करोड़ रुपये के फंड से जुटाए गए। यह घोटाला स्थानीय प्रशासन और बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।
अवैध घुसपैठियों पर होगी कार्रवाई
जांच की मांग के साथ ही यह भी तय किया गया है कि इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जाएगी। दोषी पाए जाने पर इन्हें बसों में भरकर वापस उनके देश भेजा जाएगा।
चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप
यह भी आरोप है कि चुनाव आचार संहिता के दौरान इन फर्जी प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग किया गया। अवैध घुसपैठियों के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ी करने की आशंका जताई जा रही है।
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जनता में रोष, जांच की मांग तेज
यह मामला उजागर होने के बाद स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है। जनता का कहना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियां न केवल सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय की सामाजिक संरचना को भी प्रभावित करती हैं।
देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी
यह मामला महज अंजनगांव तक सीमित नहीं है। यह पूरे राज्य और देश के लिए चेतावनी है कि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई भविष्य में भारी पड़ सकती है। अवैध दस्तावेजों का उपयोग राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में होने की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता।
यह घोटाला न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज कैसे बनाए गए। इस मुद्दे पर त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि देश की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन बनाए रखा जा सके।











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