मेळघाट के रेट्याखेड़ा गांव में शर्मनाक घटना
By दुर्वास रोकड़े , Newsfirst24.in
Published: December 18, 2025, 04:49 PM

In Melghat, a woman suspected of witchcraft was forced to drink urine, wear a garland of slippers and was branded with iron rods
अमरावती, महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र के रेट्याखेड़ा गांव में मानवता को शर्मसार करने वाली एक अमानवीय घटना सामने आई है। 77 वर्षीय आदिवासी महिला पर चोरी और जादूटोना के शक में बर्बर अत्याचार किया गया।
पीड़िता को कुत्ते और इंसान का मूत्र पिलाया गया, चप्पलों की माला पहनाई गई, उसे बांधकर पीटा गया, गर्म सलाखों से दागा गया और पूरे गांव में उसकी नग्न परेड निकाली गई। इस घटना ने न केवल मेळघाट, बल्कि पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है।
संतों की भूमि पर मानवता को कलंक
संत गाडगेबाबा और राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज की जन्म और कर्मभूमि में हुई इस घृणित घटना ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास और असंवेदनशीलता को उजागर किया है। यह घटना समाज के लिए एक गहरी चिंता का विषय है और सामाजिक सुधार की आवश्यकता को बल देती है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
चिखलदरा ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली पर इस मामले में गंभीर सवाल उठे हैं। अमरावती के जिला पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद ने स्वीकार किया कि पुलिस ने लापरवाही बरती है। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच के बाद दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन
अमरावती पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में अंधविश्वास विरोधी कानून और अन्य कड़े प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपियों में गांव के पुलिस पाटिल और पूर्व सरपंच भी शामिल हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
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सब देखते रहे कोई पीड़िता की मदद के लिए नहीं आया
यह घटना पूरे गांव के सामने घटी, लेकिन किसी ने भी पीड़िता की मदद के लिए कदम नहीं उठाया। यह दर्शाता है कि अंधविश्वास और सामाजिक असंवेदनशीलता अभी भी गहराई से समाज में व्याप्त है। यह घटना इस क्षेत्र में जागरूकता फैलाने और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर देती है।
समाज के लिए शर्मसार करने वाली घटना
77 वर्षीय आदिवासी महिला पर हुए इस अमानवीय अत्याचार ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया है। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि अंधविश्वास और असंवेदनशीलता के खिलाफ तत्काल और सख्त कदम उठाए जाएं। इस घटना ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सामाजिक संगठनों और आम जनता के लिए आत्ममंथन का अवसर प्रदान किया है।











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