निजामाबाद से खम्मम तक… तेलंगाना में जाली नोटों का जाल फैला!
By Ramesh Solanki, Newsfirst24.in
Published: December 30, 2025, 05:07 PM

वारंगल/आसिफाबाद। तेलंगाना में जाली नोटों का कारोबार तेजी से फैल रहा है। रातों-रात करोड़पति बनने की चाह में युवा अवैध तरीकों को अपना रहे हैं, जिनमें नकली मुद्रा का धंधा प्रमुख है। पुलिस की सख्ती के बावजूद इस अपराध पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। हाल ही में वारंगल पुलिस ने बड़े जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश कर 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
8 लोग गिरफ्तार, लाखों के नकली नोट बरामद
काकतीय विश्वविद्यालय परिसर पुलिस ने नकली नोट छापने और चलाने के आरोप में 8 लोगों को पकड़ा है। उनके पास से –
✅ 38.84 लाख रुपये नकद
✅ 21 लाख रुपये के नकली नोट
✅ एक कार और 9 मोबाइल फोन
✅ नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला कागज
बरामद किया गया।
चार गुना मुनाफे का लालच देकर फंसाते थे लोग
वारंगल पुलिस आयुक्त अंबर किशोर झा के मुताबिक, यह गिरोह लोगों को असली नोट देकर चार गुना अधिक नकली मुद्रा देने का लालच देता था। इस धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड भद्राद्री कोठागुडेम जिले का मणिकला कृष्णा (57) है, जिसने जल्दी अमीर बनने के लिए इस गोरखधंधे में कदम रखा। उसने हन्माकोंडा के एर्रागोल्ला श्रीनिवास के साथ मिलकर नकली नोटों का नेटवर्क खड़ा किया।
पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा
पुलिस ने आरोपियों को उस वक्त गिरफ्तार किया, जब वे वारंगल आउटर रिंग रोड के पेगडापल्ली चौराहे पर नकली नोटों की डील कर रहे थे। गिरोह के सरगना कृष्णा समेत चार आरोपी कार में पहुंचे थे, जबकि श्रीनिवास और दो अन्य पहले से वहां मौजूद थे। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारकर सभी को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
🔴 कृष्णा पर पहले भी सथुपल्ली, वीएम बंजारा और लक्ष्मी देवीपेटा पुलिस थानों में नकली नोट छापने और चलाने के केस दर्ज हैं।
तेलंगाना में कहां-कहां सक्रिय है गिरोह?
➡ निजामाबाद से खम्मम तक
➡ नलगोंडा से महबूबनगर तक
➡ मंदिरों के दान पात्रों में भी जाली मुद्रा मिलने की घटनाएं
हाल ही में कामारेड्डी जिले के बिचकुंडा में एक व्यापारी को नकली नोट चलाते हुए पकड़ा गया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि वह हैदराबाद से बांसवाड़ा और फिर बिचकुंडा तक नकली नोट लाता था।
मास्टरमाइंड कौन?

पुलिस लगातार छोटे अपराधियों को पकड़ रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि नकली नोट आखिर बन कहां रहे हैं?
🚨 गिरोह के पीछे ‘रवि’ नाम के शख्स का हाथ होने की चर्चा है, जो खुद नोट छापकर कृष्णा जैसे एजेंट्स को सप्लाई करता है। हालांकि, पुलिस के पास अभी रवि की पुख्ता जानकारी नहीं है। ऐसी खबरें हैं कि उसके पास बैंक नोट छापने की मशीन भी हो सकती है।
अगर पुलिस केवल नोट चलाने वालों को पकड़ने के बजाय असली निर्माता तक पहुंचे, तो नकली मुद्रा का यह गोरखधंधा पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
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🔎संगठित गिरोह सक्रिय हैं
तेलंगाना में जाली नोटों का कारोबार सिर्फ छोटे अपराधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस को अब असली मास्टरमाइंड को पकड़ने पर ध्यान देना होगा, ताकि इस अवैध कारोबार की जड़ें पूरी तरह खत्म की जा सकें।
📍 क्या तेलंगाना पुलिस इस चुनौती से निपट पाएगी?
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