नई दिल्ली/नागपुर:
देश में कर चोरी के नए-नए तरीके सामने आते रहते हैं, लेकिन इस बार जो खुलासा हुआ है, उसने सबको चौंका दिया है। सरकार के गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) विभाग ने 90 करोड़ रुपये की चोरी का पर्दाफाश किया है। फर्जी कंपनियों के नेटवर्क ने फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिये टैक्स चोरी की थी। अब विभाग ने इन कंपनियों को 20-20 करोड़ के नोटिस थमा दिए हैं।
GST चोरी के हाईटेक तरीके
आज के डिजिटल युग में टैक्स चोरी के तरीके भी हाईटेक हो गए हैं। इन कंपनियों ने निम्नलिखित तरीकों से GST में हेराफेरी की:
1. फर्जी कंपनियों का जाल:
अस्तित्वहीन कंपनियों को सरकारी रिकॉर्ड में रजिस्टर करवाकर बड़ी संख्या में फर्जी बिल जनरेट किए गए।
इन कंपनियों का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था, सिर्फ कागजों पर चल रही थीं।
2. फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC):
कंपनियों ने बिना किसी असली व्यापार के ITC क्लेम कर लिया।
लाखों के फर्जी लेन-देन दिखाकर 90 करोड़ तक की ITC चोरी कर ली गई।
3. बोगस सप्लायर्स और खरीदार:
कई सप्लायर्स और खरीदारों के नाम पर फर्जी GSTIN बनाए गए।
नकली इनवॉइस बनाकर, बिना असल माल की सप्लाई के, GST इनपुट लिया गया।
4. डिजिटल ट्रेल मिटाने के प्रयास:
संदेह से बचने के लिए कंपनियों के बैंक खातों को लगातार बंद किया गया और नए खोले गए।
पैसे की ट्रेल मिटाने के लिए अलग-अलग शहरों में अकाउंट्स बनाए गए।
जांच का धमाकेदार खुलासा!
डीजीजीआई (DGGI) की जांच में सामने आया कि इन कंपनियों के दस्तावेज़ी पतों पर कोई असली कारोबार नहीं हो रहा था। कुछ कंपनियों के रजिस्टर्ड पते झुग्गियों और खाली प्लॉट्स पर मिले! यह एक संगठित रैकेट था, जिसमें कई राज्यों के लोग शामिल थे।
20-20 करोड़ के नोटिस जारी
जांच अधिकारियों ने कई कंपनियों के खिलाफ 20.14 करोड़ रुपये तक के नोटिस जारी किए हैं। जिन कंपनियों पर शिकंजा कसा गया है, उनमें “अक्षित ट्रेडर्स”, “संकेत इन्फ्राटेक”, “विशाल कमोडिटीज़” जैसी कंपनियां शामिल हैं।
सरकार की सख्ती और आगे की कार्रवाई
GST विभाग अब इन कंपनियों के डायरेक्टर्स पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। साथ ही, ITC दुरुपयोग रोकने के लिए GSTN (GST Network) में नए सुरक्षा फीचर्स जोड़े जा रहे हैं, ताकि ऐसी फर्जी बिलिंग पकड़ में आ सके।
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क्या बदलेगा अब?
सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके फर्जी GST क्लेम्स को ट्रैक करने की योजना बना रही है। डिजिटल लेन-देन पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि आगे से कोई भी इस तरह का फ्रॉड न कर सके।
यह मामला सिर्फ GST चोरी का नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली साजिश का है। ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि देश के राजस्व को कोई चूना न लगा सके!















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