डीसीपी के आदेश पर 5 घंटे बाद हुआ मेडिकल, X-ray में नाक की हड्डी टूटी पाई गई
By NAGPUR BUREAU, Newsfirst24.in
Published: February 28, 2025, 12:16 PM
नागपुर | सार्वजनिक परिवहन में हो रही घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। कभी बस दुर्घटनाएँ, कभी बस स्टाफ पर हमले, तो कभी महिलाओं के साथ अत्याचार—यह सब परिवहन व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। क्या समाज में बढ़ती असहिष्णुता और मानसिक संतुलन में गिरावट इसके पीछे की वजह है?
ताजा मामला नागपुर का है, जहाँ मंगलवार, 25 फरवरी 2025 को दोपहर करीब 12 बजे बर्डी से यशोधरा नगर जा रही आपली बस के ड्राइवर मोहम्मद सलमान पर अचानक हमला कर दिया गया।
₹12 का टिकट बना हमले की वजह
घटना टिपू सुल्तान चौक पर हुई, जब एक यात्री बस में सवार हुआ और कंडक्टर ने टिकट के ₹12 मांगे। यात्री ने विवाद शुरू कर दिया और बहस बढ़ने पर ड्राइवर सलमान ने उसे समझाने की कोशिश की। लेकिन गुस्साए यात्री ने ड्राइवर पर हमला कर दिया और फरार हो गया।
सलमान ने तत्काल यशोधरा नगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया।
बिना मेडिकल एफआईआर, 5 घंटे बाद हुआ इलाज
शाम 4 बजे नागपुर शहर कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष वसीम खान थाने पहुंचे। उन्होंने देखा कि पुलिस ने बिना मेडिकल परीक्षण कराए ही एफआईआर (BNS 296, 115(2), 315(2)) दर्ज कर ली थी।
थाने में मौजूद जोन 5 के डीसीपी कदम साहब से जब खान ने सवाल किया, तो उन्होंने तत्काल पीआई को निर्देश देकर ड्राइवर का मेडिकल करवाने का आदेश दिया।
ड्यूटी ऑफिसर ने सफाई दी कि सलमान को मेडिकल के लिए भेजा गया था, लेकिन उसने कहा कि वह घर के पास ही मेडिकल करा लेगा। हालाँकि, शाम को मेयो अस्पताल में मेडिकल जांच हुई, जिसमें X-ray में नाक की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई।
रात 8 बजे तक जांच के बाद सलमान को घर भेज दिया गया और उसे अगले दिन फिर से रिपोर्ट के लिए बुलाया गया। वसीम खान ने एफआईआर में धाराएं बढ़ाने की मांग की, जिस पर पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई करने की बात कही।
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क्या सिस्टम की लापरवाही अपराध बढ़ा रही है?
यह कोई अकेली घटना नहीं है। कुछ ही दिन पहले पुणे में एक युवती के साथ बस में बलात्कार हुआ, बसों की दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, और यात्रियों व बस स्टाफ के बीच मारपीट की घटनाएँ आम हो गई हैं। क्या परिवहन विभाग की लचर कार्यप्रणाली इसके लिए जिम्मेदार नहीं है?
आम जनता के लिए बनी परिवहन व्यवस्था आज खुद असुरक्षित होती जा रही है। सवाल सिर्फ इस घटना का नहीं, बल्कि बढ़ती हिंसा, असहिष्णुता और समाज में गहराते आक्रोश का भी है। आखिर हम इतने गुस्सैल और असंवेदनशील क्यों होते जा रहे हैं?
🚍 क्या सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए कड़े नियमों की जरूरत है? क्या कानून-व्यवस्था में सुधार से ऐसे अपराध रोके जा सकते हैं? आपकी राय?















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