By संदेश कान्हू,
Published: march 06, 2025, 03:13 PM
Yavatmal: Injured PC tigress successfully rescued after 24 days, released in the forest after treatment
यवतमाल: जंगल में घूम रही पीसी बाघिन, जो 24 दिनों तक गले में फंसे तार के फंदे से जूझ रही थी, आखिरकार वन विभाग और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर ली गई। 7 दिनों तक चले इलाज के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में वन विभाग, रेस्क्यू टीम और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की अहम भूमिका रही।
कैसे फंसी बाघिन?
यवतमाल जिले के जंगलों में 1 फरवरी को इस बाघिन के गले में तार फंस गया था। यह तार किसी शिकार के दौरान या फिर मानवीय गतिविधियों के चलते फंसने की आशंका जताई गई थी। घायल होने के बाद भी बाघिन जंगल में घूम रही थी, लेकिन वन विभाग इस पर लगातार नजर बनाए हुए था।
वन विभाग की निगरानी और ट्रैकिंग
- बाघिन की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए जंगल में कई ट्रैप कैमरे लगाए गए थे।
- वन विभाग की रेस्क्यू टीम हर समय निगरानी कर रही थी ताकि सही समय पर उसे ट्रैंकुलाइज किया जा सके।
- बाघिन लगातार शिकार कर रही थी, जिससे यह संकेत मिल रहा था कि वह गंभीर रूप से बीमार नहीं हुई थी।
24 फरवरी को किया गया सफल रेस्क्यू
24 फरवरी को पिलखन क्षेत्र में बाघिन द्वारा शिकार किए जाने की जानकारी मिली। जब वह शाम के वक्त अपने शिकार को खाने के लिए वहां पहुंची, तो वन विभाग की टीम ने उसे सफलतापूर्वक ट्रैंकुलाइज कर लिया।
डॉक्टरों की देखरेख में चला उपचार
- बेहोश करने के बाद बाघिन को सुरक्षित जंगल से बाहर लाया गया।
- उसकी गर्दन में फंसा तार निकालकर घाव का इलाज किया गया।
- वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की देखरेख में 7 दिनों तक बाघिन की देखभाल की गई।
सुरक्षित जंगल में छोड़ी गई बाघिन
सफल उपचार के बाद बाघिन को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है और जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम सकती है।
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वन विभाग की अपील
वन विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे जंगल में किसी भी अवैध गतिविधि, तार फंसाने जैसी घटनाओं को न करें, क्योंकि इससे वन्यजीवों को गंभीर चोटें लग सकती हैं।
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों ने राहत की सांस ली है।











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