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जिला सुकमा में दो इनामी नक्सली पुनर्वास सहित तीन नक्सलियों का आत्मसमर्पण

By MUMBAI BUREAU, Newsfirst24.in

Published: march 19, 2025, 012:47 PM

छत्तीसगढ़ शासन की “छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति” और “नियद नेल्ला नार” योजना से प्रभावित होकर, साथ ही पुलिस के बढ़ते दबाव और सुरक्षा कैंपों की स्थापना के चलते, सुकमा जिले में दो इनामी नक्सलियों सहित तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

इनामी नक्सली आत्मसमर्पण को मजबूर क्यों हुए?

नक्सली संगठन की अमानवीय विचारधारा, बाहरी नक्सलियों द्वारा भेदभाव, अत्याचार, शोषण और स्थानीय आदिवासियों पर हो रहे हिंसा से तंग आकर इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।

इन नक्सलियों की पहचान:

1️⃣ मड़कम एर्रा बाबू पिता सुब्बैया (कंचाल आरपीसी सीएनएम अध्यक्ष) – इनामी ₹2 लाख, उम्र 26 वर्ष, निवासी मुंतामडगू, थाना पामेड़, जिला बीजापुर।
2️⃣ मड़कम हड़मा पिता जोगा (कंचाल आरपीसी डीएकेएमएस अध्यक्ष) – इनामी ₹2 लाख, उम्र 41 वर्ष, निवासी कंचाल एर्रागोड़पारा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर।
3️⃣ सोडी देवा पिता दामा (मेटागुड़ा आरपीसी सीएनएम उपाध्यक्ष) – उम्र 35 वर्ष, निवासी कहेर दुलोड़, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा।

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किन अधिकारियों के समक्ष हुआ आत्मसमर्पण?

दिनांक 18 मार्च 2025 को सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में इन नक्सलियों ने बिना हथियार के आत्मसमर्पण किया। इस दौरान प्रमुख रूप से मौजूद अधिकारी:

  • श्री उमेश प्रसाद गुप्ता – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नक्सल ऑप्स, सुकमा
  • श्री अयोध्या सिंह – द्वितीय कमान अधिकारी, 151 वाहिनी सीआरपीएफ
  • श्री मनीष रात्रे – उप पुलिस अधीक्षक, नक्सल ऑप्स, सुकमा
  • उपनिरीक्षक सरजीत आलम – डीआईजी ऑफिस, सुकमा

पुलिस और सुरक्षा बलों की अहम भूमिका

डीआईजी ऑफिस सुकमा रेंज फील्ड टीम (RFT) ने सोडी देवा के आत्मसमर्पण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
151 वाहिनी सीआरपीएफ आसूचना शाखा ने मड़कम एर्रा बाबू और मड़कम हड़मा को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया।

पुनर्वास और सरकारी सुविधाएँ

सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को “छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति” के तहत सहायता राशि और अन्य सरकारी लाभ दिए जाएंगे, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें।

🔹 पुलिस और प्रशासन की यह सफलता नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा कदम है, जो आने वाले समय में और अधिक नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करेगी।

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