सावनेर में शिव मंदिर परिसर की घटना बनी कौतूहल का केंद्र, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
सावनेर | संवाददाता – किशोर ढुंढेले
सावनेर शहर के कलमेश्वर रोड स्थित बनकर लेआउट के शिव मंदिर और हनुमान मंदिर परिसर में इन दिनों एक चमत्कारिक दृश्य देखने को मिल रहा है। यहां स्थित गुल्लर (उंबर) के एक पेड़ के तने से पिछले पांच दिनों से लगातार जलधारा बह रही है। यह दृश्य श्रावण मास की पावन बेला में घटित हुआ है, जिससे इसे लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था जुड़ गई है।
पेड़ की छंटाई के बाद शुरू हुई जलधारा
स्थानीय निवासी कोलबा मंडलिक और उनके परिजनों के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी 18 जुलाई (शुक्रवार) को पेड़ की छंटाई की गई थी। कुल 8–10 बड़ी शाखाएं काटी गईं। उसी शाम, एक डाली से पानी टपकना शुरू हुआ।
अगले दिन सुबह जब लोगों ने देखा कि पानी की धार तेज हो चुकी है और लगातार बह रही है, तब इसे चमत्कार मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई।
स्थानीय समाजसेवियों ने दी जानकारी, मंदिर बना आस्था का केंद्र
महाकाली एक्वा वॉटर कंपनी के संचालक और समाजसेवी वासुदेव मेहदोले ने इस घटना की जानकारी संवाददाता को दी। जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो देखा गया कि पेड़ की एकमात्र शाखा से लगातार स्वच्छ जल बह रहा है, और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। लोग इस जल को ‘पवित्र’ मानकर घर ले जा रहे हैं।
यह खबर भी पढ़ें
धुले में कृषि मंत्री के खिलाफ शिवसेना का अनोखा आंदोलन
जालना में दिखी गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल
देवेंद्र फडणवीस के जन्मदिन पर गोंदिया में सेवा का अनूठा उपक्रम
गांव-गांव से पहुंच रहे श्रद्धालु, मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना जारी
पूरे सावनेर क्षेत्र में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे भोलेनाथ की कृपा मानकर पेड़ की पूजा कर रहे हैं। मंदिर परिसर में विशेष आरती, दुग्धाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन हो रहा है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हर आयु वर्ग के लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी आस्था
भारतीय संस्कृति में वृक्षों का विशेष स्थान बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, बरगद में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है, वहीं गुल्लर के पेड़ को कुबेर यानी धन के देवता का वास स्थान माना गया है। इसीलिए श्रावण मास में ऐसी घटना को कई लोग दैवी संकेत मान रहे हैं।
हमारा दृष्टिकोण: चमत्कार या प्रकृति का खेल?
यह खबर जहां धार्मिक आस्था और श्रद्धा से जुड़ी है, वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे प्राकृतिक घटना भी माना जा सकता है। हमारा चैनल अंधविश्वास का समर्थन नहीं करता, और दर्शकों से निवेदन करता है कि वे इस घटना को श्रद्धा के साथ-साथ नैसर्गिक परिप्रेक्ष्य में भी समझें।
श्रद्धा, कौतूहल और सामाजिक संवाद
बनकर लेआउट स्थित यह गुल्लर का पेड़ इन दिनों श्रद्धा, कौतूहल और सामाजिक संवाद का केंद्र बन चुका है। सावनेर के इस मंदिर परिसर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ यह साबित करती है कि भारतीय समाज में प्रकृति, आस्था और परंपरा कितनी गहराई से जुड़ी हुई है।
हमारे यूट्यूब चैनल से जुड़ें











Leave a Reply