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मुंबई लोकल बम धमाका: “189 लाशें… 800 ज़ख़्मी… लेकिन अब कोई गुनहगार नहीं!”

"189 लाशें… 800 ज़ख़्मी… लेकिन अब कोई गुनहगार नहीं!"

“अगर ये 12 निर्दोष थे — तो असली आतंकी है कहाँ?”

11 जुलाई 2006 — मुंबई की वह शाम आज भी जलती है…

ब्यूरो रिपोर्ट — News First

सिर्फ 11 मिनट…
7 लोकल ट्रेनें…
7 धमाके…

"189 लाशें… 800 ज़ख़्मी… लेकिन अब कोई गुनहगार नहीं!"
189 बेगुनाह लोग मारे गए… 800 से ज़्यादा ज़ख़्मी हुए…

मुंबई की रफ्तार थम गई… और शुरू हुई 19 साल लंबी एक कानूनी लड़ाई।

लेकिन अब जब इंसाफ की आख़िरी उम्मीद भी पिघलती नज़र आ रही है —
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2006 के मुंबई लोकल बम धमाकों में दोषी ठहराए गए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया।

“मैं डिब्बे के कोने में था… फिर धमाका हुआ… और मेरी ज़िंदगी थम गई!”

यह बयान है एक प्रत्यक्षदर्शी प्रभाकर मिश्रा का — पेशे से शिक्षक, जो उस समय उसी लोकल ट्रेन में मौजूद थे।

News First से उन्होंने कहा —

> “धमाके के बाद सब कुछ शांत हो गया था… जैसे ज़िंदगी ही रुक गई हो। आज भी कान में वो आवाज़ गूंजती है… लेकिन उससे ज़्यादा दर्दनाक है — अब इंसाफ भी सुनाई नहीं देता!”

कोर्ट का फैसला — जिसने पूरे देश को झकझोर दिया!

"189 लाशें… 800 ज़ख़्मी… लेकिन अब कोई गुनहगार नहीं!"
जिस केस में कभी 5 को फांसी और 7 को उम्रकैद दी गई थी,
उसी केस में अब कोर्ट ने कहा —

> “सबूत अधूरे हैं… संदेह का लाभ दिया जाता है।”

महाराष्ट्र ATS और पुलिस — धमाकों से जुड़ी सीधी कड़ी कोर्ट में साबित नहीं कर सकी।

अब तक क्या हुआ? और अब कौन बाहर आया?

इन 19 सालों में एक आरोपी की हिरासत में मौत हो चुकी है,
बाकी 11 आरोपियों को अलग-अलग जेलों से रिहा किया गया।

नागपुर सेंट्रल जेल से दो आरोपी रिहा हुए — लेकिन चुपचाप!

मीडिया चार घंटे बाहर इंतजार करती रही,
लेकिन दोनों आरोपी मीडिया को चकमा देकर निकल गए —
सीधे नागपुर एयरपोर्ट से फ्लाइट के ज़रिए मुंबई रवाना हो गए।

1️⃣ एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी

2️⃣ मोहम्मद अली आलम शेर शेख

अमरावती जेल से 4 आरोपी रिहा हुए — और मीडिया को दी बाइट!

इन चारों ने खुलकर मीडिया से बात की,
ऑटो में बैठकर अपने रिश्तेदारों के साथ बाहर निकले — बिना किसी पुलिस डर या हड़बड़ाहट के।

LIVE रिहाई की तस्वीरें — जिन पर बहस अब तेज़ है

इनमें से कुछ नाम जिनकी LIVE झलक सामने आई:

C/9169 – नावेद हुसैन रशीद हुसैन खान

C/9168 – एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी

C/9171 – मोहम्मद अली आलम शेर शेख

इन सभी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया और औपचारिक रूप से रिहा किया गया !

क्या हुआ था 11 जुलाई 2006 को?

माटुंगा, माहिम, बांद्रा, खार, जोगेश्वरी, बोरीवली और मीरारोड — हर स्टेशन पर चीख-पुकार

प्रेशर कुकर बम — टाइमर से ट्रेन डिब्बों में फटे

मुंबई की रफ्तार एक पल में ठहर गई

तो अब असली गुनहगार कौन है?

तीन आरोपियों ने जांच में बताया था कि
रियाज भटकल (इंडियन मुजाहिदीन) इस हमले का मास्टरमाइंड था।
लेकिन कोर्ट में वो साक्ष्य टिक नहीं पाए।

अब फिर वही सवाल —
अगर ये 12 निर्दोष थे — तो असली आतंकी कहाँ है?

पीड़ितों का दर्द: “हमें फिर से मार दिया गया…”

एक पीड़िता की बहन ने कहा —

> “पहले हमारे भाई मारे गए… अब न्याय की भी हत्या हो गई!”

 

परिजनों की आंखों में ग़ुस्सा और मायूसी थी —
“अब हमारे पास न अपनों की याद का मुआवजा है, न इंसाफ की कोई उम्मीद…”

सरकार का रुख: सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा महाराष्ट्र

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है —

> “हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।”

19 साल की जांच — क्या बस एक ‘गलती’ थी?

या फिर कोई ऐसी सच्चाई है, जो आज भी सामने नहीं आई?

अब सवाल सिर्फ ये नहीं कि —
बम किसने रखा?
बल्कि ये भी कि —
इंसाफ किसने दबा दिया?

जिनकी ज़िंदगी चली गई… वो अब भी सवालों में जिंदा हैं…

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