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चींटियों ने खोली अस्पताल की सच्चाई! ऑपरेशन के बाद बेहोश मरीज पर चढ़ीं चींटियां

चींटियों ने खोली अस्पताल की सच्चाई!

हिंगणघाट उपजिला अस्पताल में मरीज की उपेक्षा

हिंगणघाट से अमोल मुन की रिपोर्ट
हिंगणघाट के उपजिला अस्पताल से एक दिल दहला देने वाली लापरवाही की तस्वीर सामने आई है। यहां ऑपरेशन के बाद आंतर रुग्ण कक्ष में रखे गए एक बेहोश मरीज के शरीर पर चींटियां चढ़ गईं। यह घटना सिर्फ एक मरीज के साथ नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के मुंह पर एक तमाचा है।

चींटियों ने खोली अस्पताल की सच्चाई!
चिचघाट (लाडकी) गांव निवासी प्रमोद तुलशीराम भोयर को हर्निया की शिकायत के बाद हिंगणघाट उपजिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। दोपहर 12 बजे उनका ऑपरेशन किया गया। जब उन्हें आंतर रुग्ण कक्ष में शिफ्ट किया गया, तो वे बेहोश थे। उसी दौरान उनके शरीर पर चींटियां चढ़ गईं।

यह घटना न सिर्फ मरीज की उपेक्षा दर्शाती है, बल्कि अस्पताल की बदहाल स्वच्छता व्यवस्था की पोल भी खोल देती है।

बाइट/वॉयसओवर:
प्रभारी वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. राहुल भोयर ने घटना को स्वीकार करते हुए कहा — “अस्पताल परिसर में चींटियों का प्रकोप है। हम प्रयास कर रहे हैं इसे नियंत्रित करने का।”

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह स्पष्टीकरण पर्याप्त है? जब ऑपरेशन के बाद का समय सबसे संवेदनशील होता है, तब ऐसी लापरवाही कैसे हो सकती है?

स्वास्थ्य सेवाओं की हालत
स्वास्थ्य सेवाओं की हालत ऐसी हो चली है कि मरीज ऑपरेशन टेबल से सीधे उपेक्षा की शिकार हो जाते हैं। हिंगणघाट जैसे बढ़ते कस्बे में पूर्णकालिक अधीक्षक की अनुपस्थिति व्यवस्था को और चरमरा रही है।

भरोसे को झकझोर दिया है


हिंगणघाट उपजिला अस्पताल की यह घटना महज एक उदाहरण नहीं, बल्कि एक चेतावनी है — कि अगर व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो अगली बार मामला और गंभीर हो सकता है। मरीजों को सम्मानजनक और सुरक्षित इलाज मिले, यह शासन और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

अस्पतालों को इमारत नहीं, भरोसे की बुनियाद पर चलना होता है — और हिंगणघाट की इस घटना ने उस भरोसे को गहरे झकझोर दिया है।

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