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दादा का वादा झूठा निकला : विजय घाडगे पाटील का सरकार के खिलाफ हल्ला बोल

दादा का वादा झूठा निकला : विजय घाडगे पाटील का सरकार के खिलाफ हल्ला बोल

लातूर | मोमीन हारून

दादा का वादा झूठा निकला : विजय घाडगे पाटील का सरकार के खिलाफ हल्ला बोलकृषी मंत्री माणिकराव कोकाटे का रम्मी खेलने का व्हिडीओ वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है। अखिल भारतीय छावा संघटन के प्रदेश युवा अध्यक्ष विजय घाडगे पाटील ने मंगलवार को लातूर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने ऐलान किया कि किसानों के मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

व्हिडीओ विवाद से भड़का विरोध

कुछ दिन पहले विधानभवन परिसर में कृषी मंत्री माणिकराव कोकाटे का रम्मी खेलने का एक व्हिडीओ सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए विजय घाडगे पाटील ने मंत्री को पद से हटाने की मांग की थी और प्रतीकात्मक विरोध के तहत उन्हें ताश की गड्डी भेंट की थी। इसके बाद लातूर में राष्ट्रवादी (अजित पवार गुट) के कार्यकर्ताओं ने घाडगे पाटील पर हमला कर दिया। इस घटना की पूरे राज्य में तीखी निंदा हुई।

अजित पवार ने दिया था आश्वासन

हमले के बाद घाडगे पाटील ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार से मुलाकात की थी। उस समय पवार ने उन्हें आश्वासन दिया था कि मंगलवार तक कृषी मंत्री कोकाटे पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन मंगलवार को कोई भी निर्णय न होने पर घाडगे पाटील ने तीखी नाराजगी जताई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा—
“दादा का वादा झूठा निकला। दादा ने अपना वचन नहीं निभाया। दादा बात के पक्के नहीं। उन्होंने किसानों को धोखा दिया।”

किसानों के मुद्दों पर आंदोलन का बिगुल

घाडगे पाटील ने साफ कहा कि अब छावा संघटन सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि राज्यव्यापी आंदोलन करेगा। उन्होंने ऐलान किया कि आंदोलन का केंद्र किसानों की समस्याएं होंगी। इसमें विशेष रूप से —

  • सोयाबीन को उचित भाव दिलाना

  • किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी

  • पीकविमा की त्वरित उपलब्धता

शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार अगर इन मुद्दों पर गंभीर नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा।

राजनीतिक असर

इस घटनाक्रम ने अजित पवार गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विरोधियों के साथ-साथ अब सहयोगी संगठन भी नाराजगी जता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन अगर राज्यभर में फैलता है तो सरकार के लिए यह बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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