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Nagpur News: Anees Ahmed returns to Congress… Read the real story behind his return

अनीस अहमद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री अनीस अहमद पांच दिन पहले अचानक कांग्रेस छोड़कर वंचित बहुजन आघाड़ी में पहुंच गए थे मगर पांच दिन बाद ही वापस कांग्रेस में लौट आए। हालांकि यह बात Newsfirst24.in ने अपने सूत्रों के हवाले से पहले ही बता दिया था कि अनीस अहमद नामांकन भरने में जानबूझकर देर से पहुंचे थे। जानिए वापसी की असली कहानी।
विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी के लिए वंचित बहुजन आघाड़ी में प्रवेश लेने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री अनीस अहमद कांग्रेस में लौट आए हैं। मुंबई में वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश लिया। 5 दिन में पार्टी में वापसी के संबंध में उन्होंने कहा है-मैं पार्टी से बाहर गया ही नहीं। पार्टी में रहकर ही मैंने वंचित बहुजन आघाडी का उम्मीदवार संबंधी एबी फार्म लिया था। नामांकन दर्ज कराने में तकनीकी कारणों से विलंब के कारण मेरा नामांकन स्वीकर नहीं किया गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के समझाने के बाद वापस आए
Newsfirst24.in के वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है उसके अनुसार कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अनीस अहमद से वंचित बहुजन आघाड़ी का उम्मीदवारी बनते ही उनकी कांग्रेस में वापसी के प्रयास शुरू हो गए थे। नागपुर के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता को मुंबई में बैठे एक बड़े नेता ने अहमद की वापसी की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनका काम था कि वे अनीस को समझाकर वंचित बहुजन अघाड़ी से वापस लाएं। हालांकि शुरुआत में अनीस ने जमकर अपनी नाराजगी जाहिर की और इसके लिए मना भी कर दिया।
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अनीस को समझाया गया कि वंचित बहुजन आघाड़ी में फ्यूचर नहीं है
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने अनीस को समझाया कि वंचित बहुजन आघाड़ी में उनका फ्यूचर नहीं है। पहली बात तो उनके जीतने में कई बाधाएं हैं। चुनाव के बाद उन्हें कोई पूछेगा नहीं। जबकि कांग्रेस में उनकी सीनियरटी हमेशा बनी रहेगी। चुनाव के शुरुआत में कुछ दिन उनकी चर्चा जरूर रहेगी, मगर वह केवल चुनाव के समय तक ही सीमित रहेगी। जिस दिन अनीस को नामांकन भरना था उसके ठीक कुछ घंटे पहले वह मन बना चुके थे कि उन्हें वंचित बहुजन आघाड़ी से नामांकन नहीं भरना है। हालांकि इस बात की पुष्टि उन्होंने नहीं की। और वे कांग्रेस में लौटने के लिए अन्य कारण दे रहे हैं।
कांग्रेस की उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज थे
मध्य नागपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की उम्मीदवारी नहीं मिलने पर अनीस अहमद ने 28 अक्टूबर को वंचित बहुजन आघाडी में प्रवेश लिया था। मुंबई के राजगृह में आघाडी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने उनका पार्टी में प्रवेश करवाया था। साथ ही मध्य नागपुर के लिए उम्मीदवार घोषित किया था।
2 मिनट लेट पहुंचे थे
29 अक्टूबर को नामांकन दर्ज कराने का अंतिम दिन था। दोपहर 3 बजे तक निर्वाचन अधिकारी कक्ष पहुंचना था लेकिन अहमद एक से 2 मिनट विलंब से पहुंचे। उन्हें सुरक्षा कर्मचारियों ने निर्वाचन अधिकारी कक्ष में जाने नहीं दिया। अहमद अघाड़ी के उम्मीदवार नहीं बन पाए। इस मामले को लेकर अहमद ने प्रशासन पर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी उम्मीदवारी रोकने के लिए दबाव डाला गया है।
अब इसे पॉलिटिकल गेम का नाम दिया
अनीस अहमद की नाराजगी को अब कांग्रेस का पॉलिटिकल गेम कहकर प्रचारित किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि वंचित बहुजन आघाडी व एमआईएम से अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं आने देने के लिए कांग्रेस ने अहमद के माध्यम से पॉलिटिकल गेम खेला।
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1982 से कांग्रेस से जुड़े हैं अहमद
अनीस अहमद का राजनीतिक करियर 1982 में शुरू हुआ। वह कांग्रेस की छात्र शाखा एनएसयूआई में शामिल हुए। 1987 में एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष बने। 1990 में नागपुर सेंट्रल से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और छह वोटों से हार गए। 1995 में वह नागपुर सेंट्रल सीट से पहली बार विधायक चुने गए। 1996 में वह चीफ व्हिप बने। 1999 में दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद वह महाराष्ट्र के मंत्री बने। 2004 में फिर से वह विधायक बने और उन्हें सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। 2009 में वह नागपुर पश्चिम में चले गए लेकिन हार गए। 2014 में अनीस अहमद नागपुर सेंट्रल में वापस आए लेकिन फिर से हार गए। 2019 में उन्हें टिकट नहीं मिला। 2024 में भी टिकट न मिलता देख वह भड़क गए और कांग्रेस छोड़कर वंचित आघाडी में शामिल हो गए।















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