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कवि शैलेश लोढ़ा ने किया वरिष्ठ कवि पं. जीवनलाल मिश्रा के काव्य संग्रहों का भव्य विमोचन

नोहलेश्वर महोत्सव में वरिष्ठ कवि पं. जीवनलाल मिश्रा के काव्य संग्रहों का भव्य विमोचन

मध्यप्रदेश शासन के मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी और देश के ख्यात कवि शैलेश लोढ़ा ने किया विमोचन

By BHOPAL BUREAU, Newsfirst24.in

Published: march 14, 2025, 04:33 PM

Grand release of the poetry collections of Damoh’s senior poet Pt. Jeevanlal Mishra at Noheshwar Festival

दमोह/नोहटा। नोहलेश्वर महोत्सव का यह वर्ष ऐतिहासिक बन गया जब 25 फरवरी 2025 को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित वरिष्ठ कवि एवं शिक्षाविद पं. जीवनलाल मिश्रा (senior poet Pt. Jeevanlal Mishra ) के दो काव्य संग्रह “चेतना के स्वर” और “अशेष स्मृतियां” का विमोचन हुआ। इस गरिमामयी अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति एवं पर्यटन स्वतंत्र प्रभार मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी और देश के ख्यात  अंतरराष्ट्रीय कवि श्री शैलेश लोढ़ा (तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम) उपस्थित रहे।

(The country’s renowned poet Shailesh Lodha released the poetry collection of Jeevanlal Mishra)

बहुमुखी प्रतिभा के धनी, क्षणों में रच देते हैं कविता

नोहलेश्वर महोत्सव में वरिष्ठ कवि पं. जीवनलाल मिश्रा के काव्य संग्रहों का भव्य विमोचनपं. जीवनलाल मिश्रा ( Pt. Jeevanlal Mishra )केवल एक प्रतिष्ठित कवि और शिक्षक ही नहीं, बल्कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी भी हैं। वे परिस्थितियों के अनुसार कुछ ही मिनटों में बड़ी से बड़ी कविता रच देते हैं और विशेष मौकों पर सुनाते हैं। उनकी इस विलक्षण प्रतिभा को देखकर बड़े से बड़े अधिकारी अचंभित रह जाते। कई बार उनकी रचनाएँ इतनी गहरी होतीं कि कलेक्टर जैसे अधिकारी भी सुनकर भावुक हो जाते और उनकी आँखों में आँसू छलक आते।

शैलेश लोढ़ा ने सराहा मिश्रा जी की कविताओं को

शैलेश लोढ़ा ने जब उनकी कविताएँ पढ़ीं तो उन्होंने कहा कि “यह कविताएँ समाज और देश की धरोहर से कम नहीं हैं। यह हमेशा समाज को जागरूक करती रहेंगी और प्रेरणा देती रहेंगी।” उन्होंने मिश्रा जी की साहित्यिक प्रतिभा को नमन करते हुए कहा कि उनकी कविताएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक रहेंगी जितनी आज हैं।

कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक, जिनकी मेहनत बनी मिसाल

दमोह के जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में उन्होंने दूर-दराज के स्कूलों में दिन-रात मेहनत कर यह सुनिश्चित किया कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। जहां आमतौर पर अधिकारी जाने से कतराते, मिश्रा जी वहां भी पहुंचते। बरसात के दिनों में जब गांवों में बाढ़ आ जाती, तो भी वे उफनती नदियों को पार कर स्कूलों तक पहुंचते। उनका यह समर्पण उन्हें बाकी शिक्षकों और अधिकारियों से अलग बनाता था। उनके कार्यों की गूंज प्रशासनिक गलियारों तक थी, यही कारण है कि दमोह के कलेक्टर और कमिश्नर भी उनके कार्यों की तारीफ करते नहीं थकते।

जब वे किसी अधिकारी से मिलने जाते थे, तो कलेक्टर जैसे वरिष्ठ अधिकारी स्वयं आगे आकर उनका स्वागत करते, ताकि उन्हें प्रतीक्षा न करनी पड़े। उन्हें सदैव गुरु समान सम्मान प्राप्त हुआ।

( Pt. Jeevanlal Mishra ) अद्भुत शिक्षण शैली, हर कोई बन जाता था प्रशंसक

नोहलेश्वर महोत्सव में वरिष्ठ कवि पं. जीवनलाल मिश्रा के काव्य संग्रहों का भव्य विमोचनमिश्रा जी का शिक्षण तरीका अनूठा था। बच्चों को कैसे आसानी से समझ आए, इसके लिए वे आए दिन नए-नए प्रयोग करते। जो भी अधिकारी उन्हें एक बार पढ़ाते हुए देखता, वह उनका प्रशंसक हो जाता और उन्हें गुरु की तरह सम्मान देने लगता।

संघर्षों से भरा जीवन, फिर भी अटूट जज़्बा

मिश्रा जी बचपन से ही संघर्षशील रहे हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई खुद के खर्चे से पूरी की और हमेशा आत्मनिर्भर बने रहे। उनका जीवन कठिनाइयों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। रिटायरमेंट के बाद भी वे अपने खेतों में उसी जोश और ऊर्जा के साथ मेहनत कर रहे हैं। वे रोज नई-नई फसल उगाते हैं, और उनकी मेहनत देखकर युवा भी शर्मा जाएं। लेकिन मिश्रा जी की ऊर्जा कभी कम नहीं होती। वे अपने गांव के आसपास के किसानों को भी बेहतर खेती के लिए प्रेरित करते हैं।

साहित्य जगत की अनमोल धरोहर

उनके काव्य संग्रह “चेतना के स्वर” और “अशेष स्मृतियां” में 80-80 रचनाएँ संकलित हैं, जो भारतीय संस्कृति और साहित्य की अमूल्य निधि हैं। श्री शैलेश लोढ़ा और मंत्री महोदय ने मिश्रा जी को साहित्य जगत की अनमोल धरोहर बताते हुए उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।

परिवार से मिली प्रेरणा

नोहलेश्वर महोत्सव में वरिष्ठ कवि पं. जीवनलाल मिश्रा के काव्य संग्रहों का भव्य विमोचनमिश्रा जी के दो पुत्र दीपक मिश्रा और नीरज मिश्रा हैं, जिन्हें उन्होंने सदैव कर्तव्यनिष्ठा और परिश्रम का पाठ पढ़ाया। उनकी दो बेटियाँ भी अत्यंत प्रतिभाशाली हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। उनकी पत्नी हमेशा उनकी कविताओं की पहली श्रोता और प्रेरणा रही हैं। वे अपनी रचनाएँ सबसे पहले उन्हें सुनाते और उनके सुझावों को शामिल कर अंतिम रूप देते। उनकी कई अप्रकाशित कविताएँ इतनी मार्मिक हैं कि उन्हें सुनकर लोगों की आँखों में आँसू आ जाते हैं।

कवि के मनमौजी स्वभाव ने छोड़ा कई काव्यों को अप्रकाशित

मिश्रा जी अपने मनमौजी स्वभाव के कारण कविताएँ केवल अपनी संतुष्टि के लिए लिखते थे, ना कि किसी प्रकाशन की लालसा में। यही कारण है कि उनके कई अमूल्य काव्य अप्रकाशित रह गए। साहित्य जगत उनके इन छिपे हुए रत्नों के प्रकाशन की प्रतीक्षा कर रहा है।

संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणा

इस भव्य आयोजन में उपस्थित साहित्यप्रेमियों, शिक्षकों और गणमान्य नागरिकों ने इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनते हुए मिश्रा जी को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उनका जीवन समर्पण, मेहनत और प्रेरणा की मिसाल है, जो हर पीढ़ी को सीख देता रहेगा।

जीवन लाला मिश्रा ( Pt. Jeevanlal Mishra )का जीवन परिचय

नाम: जीवन लाल मिश्र ‘विकल’
जन्म: 01 जनवरी 1943, ग्राम लुहारी, जिला दमोह, मध्यप्रदेश
पिता: श्री लखन लाल मिश्र
माता: श्रीमती रामदुलारी मिश्र
पत्नि: श्रीमती प्रभावती मिश्र

शिक्षा एवं शासकीय सेवा

शैक्षणिक योग्यता: स्नातकोत्तर (हिन्दी)
सेवा यात्रा:

  • 27 मार्च 1964 – 30 मई 1997: शिक्षण कार्य
  • 01 जनवरी 1999: राज्य स्त्रोत समन्वयक (राजीव गांधी शिक्षा मिशन)
  • 14 जून 2000 – 01 दिसंबर 2004: जिला शिक्षा कार्यक्रम अधिकारी, दमोह

साहित्यिक योगदान

  • जिला शिक्षा विभाग की वार्षिक पत्रिका गरिमा का संपादन
  • शासकीय योजनाओं के प्रचार हेतु प्रेरणादायक गीतों की रचना (प्रेरणा)
  • 500+ कविताओं का सृजन (प्रकाशाधीन)
  • काव्य संग्रह अशेष स्मृतियाँ प्रकाशित

सम्मान एवं उपलब्धियाँ

  • 26 जनवरी 1992: सर्वश्रेष्ठ जनगणना कार्य हेतु राष्ट्रपति पदक प्राप्त
  • 05 सितंबर 1995: राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित
  • 24 दिसंबर 1996: मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मुहम्मद शफी कुरैशी द्वारा सम्मान
  • 24 सितंबर 1998: पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी द्वारा सम्मान
  • 06 मार्च 1994: सांसद श्री रामकृष्ण कुसमरिया द्वारा सम्मान
  • 26 जनवरी 1992: मंत्री श्री जयंत मलैया द्वारा सम्मान
  • 05 सितंबर 2001: मंत्री श्री राजा पटेरिया द्वारा सम्मान

विरासत

जीवन लाल मिश्रा ‘विकल’ ने अपने संपूर्ण जीवन को शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा के लिए समर्पित किया। उनकी लेखनी और प्रशासनिक योगदान ने शिक्षा जगत में प्रेरणा का कार्य किया।

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