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नक्सल प्रभावित क्षेत्र में साइकिल पर सफर कर रहे अहेरी के एडिशनल कलेक्टर, वाहन नहीं मिला

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में साइकिल पर सफर कर रहे अहेरी के एडिशनल कलेक्टर, वाहन नहीं मिला

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बिना सरकारी वाहन, पैदल और साइकिल से निभा रहे अपनी जिम्मेदारी

By नरेश सहारे, Newsfirst24.in

Published: February 24 , 2025, 09:35 PM

 नक्सल प्रभावित क्षेत्र में साइकिल पर सफर कर रहे अहेरी के एडिशनल कलेक्टर, वाहन नहीं मिला गढ़चिरौली |  महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में जहां सरकारी अधिकारियों की तैनाती एक चुनौती मानी जाती है, वहीं अहेरी के अतिरिक्त जिला कलेक्टर विजय भाकरे पिछले 17 महीनों से बिना सरकारी वाहन के अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। प्रशासन से बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके चलते वे कभी साइकिल, कभी किराए की गाड़ी, तो कभी दूसरों की गाड़ी से सफर कर रहे हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में साइकिल पर सफर – मजबूरी या मिशाल?

गढ़चिरौली जिला नक्सलवाद से प्रभावित है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों का सफर करना हमेशा जोखिम भरा होता है। इस जिले के सिरोंचा, एटापल्ली, भामरागड, मुलचेरा और अहेरी जैसे 5 तालुका और 900 गांव बेहद दुर्गम हैं। यहां एक तालुका से दूसरे तालुका तक जाना आसान नहीं, लेकिन अतिरिक्त कलेक्टर विजय भाकरे ने बिना वाहन के भी अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया। जब सरकारी गाड़ी नहीं मिली, तो उन्होंने साइकिल को ही अपनी सरकारी गाड़ी बना लिया।

पिछले हफ्ते, अहेरी नगर परिषद चुनाव के दौरान मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए उन्होंने 5 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से की। यह देखकर वहां मौजूद लोगों और अन्य अधिकारियों को आश्चर्य हुआ कि जिले का एक वरिष्ठ अधिकारी इस हाल में काम कर रहा है।

26 साल की सेवा के बाद भी वाहन नहीं, लेकिन जिम्मेदारी से समझौता नहीं

विजय भाकरे ने 7 अगस्त 2023 से अहेरी में अतिरिक्त कलेक्टर का कार्यभार संभाला था। उनकी सरकारी गाड़ी, जो 2012 मॉडल की फिएट थी, जनवरी 2024 में आरटीओ द्वारा अनफिट घोषित कर दी गई। लेकिन उससे पहले ही वाहन में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके चलते उसका उपयोग असंभव हो गया।

एक वरिष्ठ अधिकारी, जिनकी जिम्मेदारी चार तालुकों के 900 से अधिक गांवों की प्रशासनिक देखरेख करना है, वे बिना सरकारी वाहन के काम कर रहे हैं।

जब वाहन नहीं मिला, तो उन्होंने क्या किया?

  • कभी अपनी पुरानी साइकिल से सफर किया।
  • कभी किसी अधिकारी या कर्मचारी की बाइक उधार ली।
  • कभी किराए की गाड़ी में पैसे खर्च करके अपने कर्तव्य का पालन किया।
  • आंतरिक गांवों तक पैदल पहुंचे, तो कई बार नदियों को नाव से पार किया।

प्रशासन की अनदेखी या व्यवस्था की कमजोरी?

गढ़चिरौली जैसे संवेदनशील जिले में, जहां माओवादी गतिविधियां लगातार बनी रहती हैं, वहां एक वरिष्ठ अधिकारी बिना सुरक्षा व्यवस्था और वाहन के काम कर रहा है। यह न केवल उनके लिए जोखिम भरा है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की गंभीर अनदेखी को भी उजागर करता है।

अहेरी का कलेक्टर पद क्यों महत्वपूर्ण है?

  • 2010 में इस पद का सृजन हुआ था, ताकि दक्षिण गढ़चिरौली के विकास को गति दी जा सके।
  • यह क्षेत्र खनन गतिविधियों और नक्सल प्रभाव के कारण हमेशा संवेदनशील रहा है।
  • यहां प्रशासनिक फैसलों और विकास योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए एक मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता होती है।

भाकरे का संदेश – “बाधाओं के बावजूद कर्तव्य से पीछे नहीं हटूंगा”

भाकरे कहते हैं, “सरकारी वाहन न होने से मुझे कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन मैंने अपने कर्तव्यों को प्रभावित नहीं होने दिया।” वे चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करे, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को सुचारू रूप से निभा सकें।

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क्या सरकार जागेगी?

अब सवाल उठता है कि क्या सरकार और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा? क्या एक अधिकारी को साइकिल और उधार की गाड़ियों पर निर्भर रहकर काम करना पड़ेगा, या फिर जल्द ही उन्हें वह सुविधाएं मिलेंगी, जो उनके पद के अनुसार अनिवार्य हैं?

इस खबर ने ब्यूरोक्रेसी में व्याप्त अनदेखी और संसाधनों के असमान वितरण की पोल खोल दी है। यह एक चेतावनी भी है कि यदि प्रशासन अपने ही अधिकारियों को बुनियादी सुविधाएं देने में विफल रहता है, तो आम जनता तक सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे पहुंचेगा?

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