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आखिर कैसे माने शिंदे: बीजेपी के B प्लान की भनक लगते ही मनाने में एक्टिव हो गई थी शिंदे सेना

आखिर कैसे माने शिंदे: बीजेपी के B प्लान की भनक लगते ही मनाने में एक्टिव हो गई थी शिंदे सेना

कल शाम गोपनीय बैठक में कुछ मांगों पर स्वीकृति के बाद बात आगे बढ़ी

By MUMBAI BUREAU, Newsfirst24.in

Published: December 05, 2024, 02:47 PM

How did Shinde agree: As soon as they got a hint of BJP’s Plan B, Shinde Sena became active in persuading them

आखिर कैसे माने शिंदे: बीजेपी के B प्लान की भनक लगते ही मनाने में एक्टिव हो गई थी शिंदे सेना

मुंबई। महाराष्ट्र में करीब 12 दिनों से सियासी संग्राम चरम पर था। पहले CM कौन बनेगा? कई दिनों के सस्पेंश खत्म होने के बाद क्या एकनाथ शिंदे DCM बनेंगे तक कई खबरें सामने आईं। शपथ के एक दिन पहले आखिरकार शिंदे DCM  बनने के लिए तैयार हो गए। आखिर इसके पीछ की वजह क्या थी? शिंदे को मनाने की इनसाइड स्टोरी का खुलासा Newsfirst24 यहां कर रहा है। आखिरकार कैसे शिंदे रातों-रात DCM की शपथ के लिए माने।

दिल्ली से लौटने के बाद से खफा थे शिंदे

आखिर कैसे माने शिंदे: बीजेपी के B प्लान की भनक लगते ही मनाने में एक्टिव हो गई थी शिंदे सेना

पूरी कहानी की शुरुआत कुछ दिनों पहले होती है। जब एकनाथ शिंदे बुरी तरह से बीजेपी से रूठकर अपने गांव जाकर बैठ गए थे। दरअसल, वे दिल्ली में जब बीजेपी आलाकमान से मिले तो उन्होंने अपनी मंशा जाहिर कर दी। हालांकि आलाकमान ने इनके मुंबई पहुंचने के पहले ही संदेश दे दिया कि वह संबंधित मांगों को नहीं मानेंगे। इस पर शिंदे भी अपनी जिद पर अड़ गए। मांगों में मुख्य रूप से था या तो उन्हें सीएम बनाएं या फिर गृह विभाग सहित करीब 15 मुख्य मंत्रालय उनको दिए जाएं।

 प्लान-B के लिए अजीत पवार को दिल्ली बुलाया

आखिर कैसे माने शिंदे: बीजेपी के B प्लान की भनक लगते ही मनाने में एक्टिव हो गई थी शिंदे सेना

कई बार रूठने मनाने का खेल चला। मगर बात नहीं बनी। इसके बाद बीजेपी दिल्ली मुख्यालय में प्लान-B की रणनीति बनाई। जिसमें देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार मिलकर सरकार बनाएंगे। इसके बाद 5 दिसंबर को शपथ ग्रहण की तारीख भी घोषित कर दी गई। यह संदेश था कि एकनाथ मान जाएं तो अच्छा नहीं तो 5 को सरकार बनना तो तय है। आखिर तक शिंदे अपनी CM बनने की मांग पर खुलकर बोलने लगे। जबकि इसके पहले तक वह केवल संकेतों  में बात कर रहे थे। इसके बाद बीजेपी ने अपने B प्लान पर काम करना तेज कर दिया। जिसके लिए अजीत पवार को दिल्ली भी बुलाया गया था।

शिंदे सेना को प्लान-B की जानकारी लगी तो उन्होंने मनाने की शुरुआत की

बीजेपी के प्लान-B की जानकारी जैसे ही शिंदे सेना को लगी तो वह घबरा गए। इसके बाद एकनाथ शिंदे से लगातार अंदरखाने मीटिंगों का सिलसिला शुरू हो गए। उन्हें शिंदे सेना ने समझाया कि यदि शिवसेना शिंदे गुट सरकार में शामिल नहीं होगी तो अभी तक की सभी मेहनत बेकार चली जाएगी। शिंदे सेना के अधिकतर सदस्यों का भी यही मत है कि हर हाल में बीजेपी के साथ सरकार बनाने में शामिल हुआ जाए।

बीजेपी अपना मन बना चुकी थी

एकनाथ को जब लगा कि वे अपनी मांग को लेकर अलग-थलग पड़ गए, यदि वह अब भी अपनी हठ नहीं छोड़ते हैं तो शिंदे सेना भी उनके खिलाफ हो सकती है। क्योंकि बीजेपी ऐसी परिस्थिति में अपने सख्त कदम उठाने के लिए पहले भी जानी जाती रहेगी। वैसे भी बीजेपी की यहां मजबूरी भी नहीं है,  एकनाथ यदि साथ नहीं भी आते हैं तो वह आराम से सरकार बनाने में सक्षम हैं। इसके बाद एकनाथ डिप्टी सीएम बनने के लिए तैयार हुए।

प्रेस कान्फ्रेंस में भी दिखी नाराजगी

बुधवार को महायुति की संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस में भी एकनाथ शिंदे से जब डिप्टी सीएम की शपथ लेने संबंधी सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसका सीधे-सीधे जवाब नहीं दिया। जो बताता है कि वह अभी डिप्टी सीएम की शपथ लेंगे इस पर सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरुवार 5 बजे तक का इंतजार कर लीजिए। जबकि अजीत पवार ने स्पष्ट कहा कि मैं तो शपथ ले ही रहा हूं। शिंदे साहब का पता नहीं है। इसका मतलब ही यही है अभी भी स्थिति सामान्य नहीं है। जो खुलकर भी मीडिया के सामने आ गई।

तबीयत भी अचानक से ठीक हो गई

एकनाथ  सोमवार से बुधवार तक अपनी तबीयत ठीक नहीं होने के चलते मीटिंगों में शामिल होने से बचते नजर आए। यहां तक की वह इसे दिखाने के लिए अस्पताल भी चले गए। वहां के फुटेज भी मीडिया को आसानी से मिल गए ताकि तबीयत की बात को सही ठहराया जाए। बुधवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते समय एकनाथ  सामने आ गए और वह पूरी तरह स्वास्थ्य दिख रहे थे जिससे अंदाजा लगाया जा सकता था कि वह केवल अपनी नाराजगी बताने के लिए बीमारी का सहारा ले रहे थे।

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अब गृह मंत्रालय का क्या

गृह मंत्रालय पर अभी भी सस्पेंश बना हुआ है। हालांकि सूत्रों के अनुसार बीजेपी एक बार शिंदे को यह विभाग देने पर विचार कर रही है। क्योंकि बीजेपी अपने सिर यह कलंक नहीं लगने देना चाहती है कि एकनाथ शिंदे को सत्ता के लिए साथ रखा और सत्ता मिलने के बाद उनके किनारा कर लिया। इसलिए आखिर तक उनको मनाने का प्रयास किया जाता रहा।

शिंदे और फडणवीस की बैठक में कुछ मंत्रालयों पर सहमति बनी है

बुधवार को लगातार दूसरा दिन था जब फडणवीस ने वर्षा में शिंदे से मुलाकात की, पहले उन्हें महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल होने के लिए मनाने के लिए और सत्ता में भागीदारी के फॉर्मूले को अंतिम रूप देने के लिए दूसरी मुलाकात हुई। करीब 30 मिनट तक चली इस बैठक में कुछ मंत्रालयों के बंटबारे पर सहमति बनी है। हालांकि अंतिम फैसला लेना अभी बाकी है।

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