नागरिकों में बढ़ा असमंजस
गोंदिया – आमगांव नगर परिषद मामला भले ही न्यायालय से सुलझ चुका हो, लेकिन राज्य सरकार की अनदेखी के कारण स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। 25 अक्टूबर 2024 को महाराष्ट्र सरकार ने उच्च न्यायालय में दाखिल अपनी याचिका वापस ले ली, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस देरी के कारण आठ गांवों के नागरिकों को पिछले 10 वर्षों से प्रशासनिक अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
10 वर्षों से विकास कार्य ठप, योजनाओं का लाभ नहीं
आमगांव, पदमपुर, कुंभारटोली, बिरसी, रिसामा, किडंगीपार, बनगांव और माल्ही इन आठ गांवों में पिछले 10 वर्षों से विकास पूरी तरह ठप पड़ा है। सरकारी योजनाओं का लाभ यहां के नागरिकों तक नहीं पहुंच रहा, जिससे मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। सड़कें जर्जर हालत में हैं, पेयजल व्यवस्था चरमराई हुई है और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव बना हुआ है।
ग्राम पंचायत या नगर परिषद? प्रशासन की ढिलाई से बढ़ा असमंजस
नागरिकों की मांग है कि आमगांव को छोड़कर बाकी सात गांवों को ग्राम पंचायत के अंतर्गत लाया जाए, लेकिन सरकार इस पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले रही। विधानसभा चुनाव से पहले 25 अक्टूबर 2024 को राज्य सरकार ने याचिका वापस लेने का निर्णय तो लिया, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी कोई आदेश जारी नहीं किया गया।
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जल्द निर्णय नहीं तो होगा आंदोलन
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द से जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे व्यापक जनआंदोलन छेड़ देंगे। नागरिकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और शासन-प्रशासन की इस अनदेखी से गोंदिया जिले में बड़ा विरोध प्रदर्शन होने की संभावना है।











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