By election desk , Newsfirst24.in
Published: 1 November , 2024, 05:00 PM
-काटोल सीट पर चुनावी हार-जीत के दांव-पेंच
-अनिल देशमुख के मिलते नाम से एक शख्स को खड़ा किया

The truth of the election war between Anil Deshmukh v/c Salil Deshmukh काटोल: चुनाव की जंग में सब जायज है। साम-दाम-दंड-भेद। इसी बात का एक ताजा उदाहरण कटोल विधानसभा सीट में देखने को मिला। यहां पूर्व गृहमंत्र अनिल देशमुख ने अपनी जगह अपने बेटे सलिल देशमुख को राकांपा शरद गुट से खड़ा किया है।
इस पर भ्रम जाल डालने के लिए राकांपा अजित गुट ने अनिल देशमुख नामक एक अन्य शख्स को सलिल देशमुख के सामने खड़ा कर दिया। इससे ऐसे भ्रम फैल रहा है कि बेटे सलिल देशमुख के खिलाफ पिता अनिल देशमुख खड़े हुए हैं। चूकि, अनिल देशमुख का यह गढ़ रहा है इसलिए उन्हें पहली प्राथमिकता में लोग वोट देंगे।
मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति
पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के नाम पर राकांपा अजित गुट के कार्यकर्ता की उम्मीदवारी मतदाताओं के बीच भ्रम बना दी। अविभाजित राकांपा में अनिल देशमुख घड़ी चिन्ह पर चुनाव लड़ते रहे हैं।
इस बार भले ही वे उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन उनके ही नाम पर राकांपा अजित गुट का उम्मीदवार घड़ी चिन्ह पर चुनाव लड़ेगा। राकांपा शरद गुट ने सलिल देशमुख को उम्मीदवारी दी है। वे तुतारी चिन्ह पर लड़ेंगे।
घड़ी V/S तुतारी की स्थिति बनी
अनिल देशमुख के घड़ी निशान V/S सलिल देशमुख के तुतारी के बीच मुकाबला जैसी स्थिति बन गई। राकांपा अजित गुट के उम्मीदवार अनिल देशमुख नरखेड तहसील में थूगाव निपानी के निवासी है। उनके पिता का नाम शंकरराव है।
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काटोल से 18 साल तक मंत्री रहे
पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख 1995 में काटोल विधानसभा क्षेत्र में चुनाव जीते। 18 साल तक वे मंत्री रहे हैं। 2014 के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी चुनाव देशमुख ने जीते है। इस बार भी राकांपा शरद गुट की ओर से उनकी उम्मीदवारी घोषित की गई थी। लेकिन उन्होंने पुत्र सलिल देशमुख को उम्मीदवारी दिलायी है।
चुनाव में हो सकता है नुकसान
राकांपा प्रमुख शरद पवार कई बार बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में उनके दल के चिन्ह के मिलते जुलते अन्य उम्मीदवार के चिन्ह के कारण उन्हें नुकसान हुआ। लोकसभा की एक सीट उन्हें गंवानी पड़ी। काटोल को लेकर राकांपा शरद गुट के कार्यकर्ता कहने लगे हैं कि नाम व चिन्ह को लेकर भ्रम होगा।
जाने अनिल देशमुख के बारे में उनके x अकाउंट से
अनिल देशमुख ने कहा मेरे नाम का गलत उपयोग
इस मामले पर पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है-भाजपा ने मेरे नाम का व्यक्ति खोजकर चुनाव मैदान में उतारा है। यह मेरे नाम से भ्रम फैलाकर गलत उपयोग करना चाह रही है।
कौन हैं अनिल शंकरराव देशमुख?

अनिल देशमुख के डुप्लीकेट नाम वाले अनिल देशमुख
काटोल विधानसभा में उम्मीदवार के नाम को लेकर खूब चर्चा है। अनिल देशमुख के बेटे सलिल के खिलाफ एनसीपी अजित पवार गुट ने भी एक ऐसा उम्मीदवार मैदान में उतारा है, जिसका नाम बिल्कुल MVA उम्मीदवार से मिलता-जुलता है। चुनाव आयोग के मुताबिक, अनिल शंकरराव देशमुख की उम्र 49 साल है, जो नरखेड तहसील के थुगाव में रहते हैं. पेशे से मजदूर अनिल अब अपने सियासी दमखम दिखाने के लिए तैयार हैं।
अनिल शंकरराव देशमुख की संपत्ति
अनिल शंकरराव देशमुख के पास किसी भी तरह की कृषि भूमि या गाड़ी नहीं है। उनकी कुल संपत्ति एक लाख 88 हजार रुपये है, जिसमें 20 हजार रुपये नकद और एक घर भी शामिल है, जिसकी कीमत 4 लाख 18 हजार रुपये है। देखकर प्रतीत होता है कि वे एक साधारण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आपको बताते चलें कि अक्सर चुनावी मैदान में पार्टियां इस तरह के उम्मीदवार को खड़ा कर देती हैं, जिससे जनता के बीच असमंजस की स्थिति बन जाए। हालांकि, कई दफा इसका फायदा भी मिल जाता है।















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