By Arvind Jadhav Newsfirst24.in
Published: December 12, 2024, 07:37 PM
मुख्यमंत्री सहायता कोष का अध्यक्ष बदला गया

रामेश्वर नाईक
Another blow to angry Shinde from Devendra Fadnavis, then a new controversy
मुंबई: मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने के बाद कल एक बड़ा फैसला लेने से हुए देवेंद्र फड़णवीस और एकनाथ शिंदे में वापस दूरी होने के संकेत दिख रहे हैं। 2014 में, बतौर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मुख्यमंत्री सहायता कोष की स्थापना की थी इसमें गरीब वर्ग के मरीज को सरकार की ओर से 3 लाख तक चिकित्सा सहायता दी जाती थी। 2022 में एक नाटकीय घटनाक्रम में एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभालने के बाद अपने करीबी मंगेश चिवटे को इस कोष का प्रमुख नियुक्त किया था। कल भाजपा नेता गिरीश महाजन के करीबी रामेश्वर नायक को इस पद पर नियुक्त किया गया। मंगेश चिवटे को इस पद से निकालने के बाद एकनाथ शिंदे और शिवसेना पार्टी में अंदरूनी नाराजगी है, लेकिन इस कारण से फड़णवीस शिंदे विवाद एक बार फिर शुरू हो गया है।
आखिर कौन हैं मंगेश चिवटे?

एकनाथ शिंदे के संकटमोचक माने जाने वाले मंगेश को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के जरिए महाराष्ट्र सरकार के कई संकटों में सफलता मिली है। मंगेश चिवटे ने महाराष्ट्र सरकार पर आए मनोज जारांगे पाटिल के संकट को टालने के लिए सफलतापूर्वक मध्यस्थता की थी, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ध्यान देना पड़ा। मंगेश चिवटे ने कोष के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री सहायता कोष के माध्यम से 32 हजार जरूरतमंद मरीजों की मदद की है और यह आंकड़ा लगभग 270 करोड़ था। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हमेशा अपने भाषणों में इस कार्य का उल्लेख किया, इसलिए इस कमरे को एक और सामान्य महत्व मिला।
एकनाथ शिंदे को क्यों टार्गेट कर रहे हैं देवेंद्र फड़णवीस?
महाराष्ट्र विधानसभा में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण में 13 दिन की देरी हुई जिसमें मुख्यमंत्री शिंदे की नाराजगी जाहिर देखी गई। आखिरकार केंद्र और शिवसेना विधायक की मध्यस्थता के कारण एक दिन पहले तक राजी नहीं होनेवाले एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयार हुए। राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि उन्होंने केंद्र सरकार में अपने शुभचिंतकों की मदद ली थी। ऐसे में कहा जा रहा है कि बीजेपी के भीतर देवेंद्र फड़णवीस का विरोध और अब एकनाथ शिंदे के शुभचिंतक की मनमानी नहीं चलने देने के पक्ष में है।
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देवेन्द्र फड़णवीस ने मुख्यमंत्री के बाद गृह विभाग भी न देने का दिया संकेत
यहां तक कि जब राज्य के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री चुने गए, तब भी महाराष्ट्र सरकार को पहला तीन दिवसीय सत्र बिना कैबिनेट के आयोजित करने पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी। सियासी गलियारे में अब भी यह चर्चा चल रही है कि क्या 16 से 18 के बीच शीतकालीन सत्र से पहले कैबिनेट का विस्तार होने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री पद पर विवाद के बाद अब गृह मंत्री पद पर भी जोरदार बहस चल रही है, लेकिन यह लगभग तय है कि बीजेपी एकनाथ शिंदे को गृह मंत्री का विभाग नहीं देगी और इसमें देवेन्द्र फड़नवीस अनुकूल नहीं है।
क्या 14 तारीख को बनेगा कैबिनेट?
सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार की नई कैबिनेट का गठन 14 तारीख को होने की संभावना है, लेकिन महागठबंधन में तीन दलों के बीच अभी भी विवाद है इसलिए तीन दिवसीय सत्र बिना कैबिनेट के आयोजित किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों समेत आम जनता की नजर इस बात पर है कि क्या शीतकालीन सत्र भी बिना कैबिनेट के आयोजित किया जाएगा।











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