“अतीक का आतंक मुक्त प्रथम प्रयागराज महाकुंभ – महाकुंभ में आप सभी का हार्दिक स्वागत
By प्रेम उपाध्याय, Newsfirst24.in
Published: December 07, 2025, 05:29 PM

प्रयागराज। प्रयागराज महाकुंभ 2025 के आयोजन के दौरान एक विवादित पोस्टर ने शहर के माहौल में हलचल मचा दी है। इस पोस्टर में माफिया अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की तस्वीरों पर क्रॉस का निशान बनाया गया है। पोस्टर का शीर्षक है “अतीक का आतंक मुक्त प्रथम प्रयागराज महाकुंभ – महाकुंभ में आप सभी का हार्दिक स्वागत।”
महाकुंभ में लगे अतीक अहमद के पोस्टर! अतीक अहमद को गोली मारने वाले युवकों को बताया देवदूत!
प्रयागराज महाकुंभ में अतीक अहमद को लेकर एक विवादित पोस्टर लगाया गया है. इस पोस्टर में लिखा गया था कि “अतीक का आतंक मुक्त प्रथम प्रयागराज महाकुंभ” महाकुंभ में आप सभी का हार्दिक स्वागत है.… pic.twitter.com/gcWJGnSZox
— Muslim Spaces (@MuslimSpaces) January 6, 2025
अतीक के पोस्टर का स्वरूप और संदेश
इस विवादित पोस्टर में अतीक अहमद और अशरफ के साथ-साथ पुलिस कस्टडी में उनकी हत्या के आरोपी लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी सिंह की तस्वीरें भी शामिल हैं। यह पोस्टर राष्ट्रीय हिंदू दल संगठन द्वारा जारी किया गया है, जिसमें अपराधियों को ‘देवदूत’ बताने की कोशिश की गई है।
पोस्टर में तकनीकी और ग्राफिक दृष्टि से एक तीखा संदेश देने की कोशिश की गई है
- 1. क्रॉस मार्किंग: अतीक और अशरफ की तस्वीरों पर क्रॉस का निशान, उनके अपराध और खात्मे की ओर सांकेतिक इशारा करता है।
- 2. संदेश का स्वर: “आतंक मुक्त महाकुंभ” जैसे शब्दों का प्रयोग न केवल ध्यान खींचता है बल्कि एक राजनीतिक और सामाजिक बयान भी देता है।
- 3. संवेदनशीलता: महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजन के बीच इस प्रकार के पोस्टर ने धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: अप्रिय घटना से बचने के लिए कार्रवाई की जा रही

इस विवादित पोस्टर को लेकर प्रयागराज का पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगे होने के कारण माहौल में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
विशेषज्ञों की राय: उद्देश्य सिर्फ ध्यान आकर्षित करना
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोस्टर डिजाइन प्रभावी है, लेकिन यह सामाजिक रूप से भड़काऊ संदेश देता है। इसके पीछे उद्देश्य सिर्फ ध्यान आकर्षित करना और विवाद खड़ा करना प्रतीत होता है।
इस घटना ने महाकुंभ जैसे धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन के बीच सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को नए सिरे से चर्चा में ला दिया है।















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