By कुंवरचंद मंडले,
Published: march 11, 2025, 01:39 PM
- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खोली अस्पताल की पोल
- डेढ़ साल पहले 12 लोगों की सामूहिक मौत से सुर्खियों में आया था अस्पताल
- अब नवजात शिशुओं के ICU वार्ड में कॉकरोच और मच्छरों का आतंक
नांदेड़ (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित डॉ. शंकरराव चव्हाण सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है। डेढ़ साल पहले इस अस्पताल में 12 लोगों की सामूहिक मौत से पूरे देश में हड़कंप मचा था और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार का दावा किया गया था। लेकिन अब एक बार फिर इस अस्पताल की हालत दयनीय नजर आ रही है।
ताजा मामला अस्पताल के शिशु गहन देखभाल इकाई (ICU) वार्ड का है, जहां कॉकरोच और मच्छरों का आतंक मचा हुआ है। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि नवजात शिशुओं के आसपास कॉकरोच खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ अस्पताल की लचर सफाई व्यवस्था को दर्शाती है, बल्कि नवजात बच्चों की जान पर मंडरा रहे खतरे को भी उजागर करती है।
बच्चों की जान को खतरा, डॉक्टर ने दी चेतावनी
वीडियो वायरल होने के बाद जब विशेषज्ञों से इस मामले पर बात की गई तो बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रमेश रेंगे ने चिंता जताते हुए कहा कि कॉकरोच और मच्छरों के संपर्क में आने से बच्चों में घातक संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। नवजात शिशु बेहद संवेदनशील होते हैं, ऐसे में अगर कोई कॉकरोच उनके नाक, मुंह या शरीर के किसी हिस्से में प्रवेश कर जाए तो उनकी जान पर भारी संकट मंडरा सकता है।
डॉ. रेंगे ने यह भी कहा कि ICU वार्ड में गंदगी, मच्छरों और कॉकरोचों की मौजूदगी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। यदि यह स्थिति जारी रही तो और भी मासूमों की जान खतरे में पड़ सकती है।
24 बच्चों की मौत के बाद भी सबक नहीं
गौरतलब है कि साल 2023 में इसी अस्पताल में 24 बच्चों की जान चली गई थी। उस समय पूरे देश में इस घटना को लेकर हंगामा मच गया था। स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठे और अस्पताल प्रशासन ने सुधार के दावे किए। लेकिन अब, डेढ़ साल बाद फिर वही स्थिति दोहराई जा रही है।
वायरल वीडियो ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य व्यवस्था और सफाई प्रबंधन के नाम पर अस्पताल प्रशासन अब भी लापरवाह बना हुआ है।
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अधिकारी ने कैमरे पर बोलने से किया इनकार
इस मामले को लेकर जब मीडिया टीम ने अस्पताल के डीन डॉ. सुधीर देशमुख से संपर्क किया, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। हालांकि, बाद में प्रेस नोट जारी कर उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी गई है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक लापरवाही की भेंट मासूम बच्चों की जान चढ़ती रहेगी? क्या प्रशासन का ध्यान केवल बड़े हादसों के बाद ही जागेगा या इस बार समय रहते कोई सख्त कदम उठाया जाएगा?
अब क्या होगा?
फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। नागरिकों और मरीजों के परिजनों का गुस्सा अब सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांग रहा है। देखना होगा कि क्या यह मामला भी पिछली घटनाओं की तरह दबा दिया जाएगा या प्रशासन इस बार कोई कड़ा एक्शन लेगा।











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