- बीजेपी गृह और वित्त विभाग अपने पास ही रखना चाहती हे
- ऐसे में महायुति में शिवसेना शिंदे और अजीत पवार को लग सकता है झटका
By Arvind Jadhav, Newsfirst24.in
Published: December 07, 2024, 11:47 AM
After oath taking, there is again a dispute in Mahayuti on Home and Finance portfolio
मुंबई: फिलहाल नई महायुति सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो चुका है, ऐसे में अब आज से 9 तारीख तक विधानमंडल का तीन दिवसीय सत्र है। सभी को उम्मीद थी कि कल तक कैबिनेट का गठन हो जाएगा। लेकिन,अब महायुति में मंत्री पद को लेकर विवाद एक बार फिर मजबूती से सामने आ रहा है।
लगभग 12 दिनों तक महायुति में गृह विभाग को लेकर एकनाथ शिंदे की नाराजगी पूरे राज्य ने देखी है। लेकिन जैसा कि सूत्रों ने पुष्टि की है कि भाजपा यह दोनों विभाग अपने पास रखेगी, और मंत्रिमंडल गठन में फिर बाधा आने से यह विधानमंडल सत्र बिना कैबिनेट के होने जा रहा है। साथ ही सरकार का शीतकालीन सत्र 16 से 23 तारीख तक नागपुर में होगा, ऐसे में महायुति सरकार की बड़ी चिंता यह है कि कैबिनेट की दुविधा कब सुलझेगी।
महायुति में अजित पवार को भी झटका देगी बीजेपी?

देवेन्द्र फडणवीस के शपथ ग्रहण वाले दिन शाम 4 बजे तक एकनाथ शिंदे की नाराजी दिखाई दी थी। इसलिए सवाल यह है कि क्या एकनाथ शिंदे को यह संभावना महसूस हुई कि गृह विभाग नहीं मिलेगा। इसके अलावा शपथ ग्रहण समारोह से पहले महायुति की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार ने एकनाथ शिंदे के सामने कहा था कि वह शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेंगे।
लेकिन उन्होंने बीजेपी को चेतावनी दी थी कि एकनाथ शिंदे के बाद शिवसेना को मंत्री पद और विभाग आवंटन के बाद , हम मंत्री पद की मांग पर फैसला करेंगे। लेकिन अब अजित पवार के लिए भी एक दुखद खबर है, ये लगभग तय है कि बीजेपी वित्त मंत्रालय खुद के पास रखना चाहती है।
गौरतलब है कि पिछली एकनाथ शिंदे सरकार में अजितदादा ने अपनी पार्टी को इस शर्त के साथ महागठबंधन में शामिल किया था कि उसे वित्त मंत्रालय चाहिए लेकिन, अब उनके लिए भी बड़े झटके के संकेत मिल रहे हैं।
आगामी मुंबई और ठाणे महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी के मनसे से युति संकेत

शपथ समारोह के बाद पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र के महागठबंधन में वापस चल रहे नाराजगी के नाटक को बीजेपी पार्टी के वरिष्ठ निरीक्षक भी देख चुके हैं। अब देवेन्द्र फडणवीस ने राज ठाकरे की मनसे के बारे में बयान देकर दबाव की तकनीक का इस्तेमाल किया है।
पिछली विधानसभा में एकनाथ शिंदे शिवसेना के विरोध के बावजूद आगामी मुंबई और ठाणे महानगर पालिका चुनाव में बीजेपी मनसे के साथ जा सकती है ऐसा एक चित्र देवेंद्र फडणवीस ने तैयार किया है। कहा जा रहा है कि उन्होंने एकनाथ शिंदे की मुंबई महानगरपालिका और शिवसेना के समीकरण को बरकरार रखने की राजनीतिक मानसिकता को हल्का झटका दिया है।
साथ ही एकनाथ शिंदे कि शिवसेना की ठाणे महानगरपालिका में सत्ता है। दोनों महानगरपालिका में मनसे का प्रभाव विधानसभा में पड़े वोटो से साफ दिखता है। जो एकनाथ शिंदे के शिवसेना को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है।
नाराजगी पर बार-बार दबावतंत्र का भाजपा का प्रयोग

फिलहाल महायुति सरकार में बहुमत में मौजूद बीजेपी किसी दबाव और नाराजगी के बारे में नहीं सोच रही है। शपथ विधि समारोह को देर लगती देखते हुई भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने शपथ समारोह कार्यक्रम स्थल का संयुक्त निरीक्षण के बजाए व्यक्तिगत निरीक्षण किया था, शिवसेना शिंदे गुट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
साथ ही राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महायुति में एकनाथ शिंदे की नाराजगी के कारण अजित पवार को दिल्ली बुलाया गया था और एकनाथ शिंदे को सरकार में शामिल होने का फैसला करने के लिए मजबूर किया गया था।
लेकिन अब एकबार फिर देवेंद्र फडणवीस ने मनसे के प्रति सद्भावना दिखाते हुए एकनाथ शिंदे की नाराजगी को नजरअंदाज कर दिया है।
यह खबर भी पढ़ें
देवेंद्र फडणवीस को चुनाव के बाद क्यों याद आए राज ठाकरे, नए समीकरण की आहट
पूरे हलचल पर महाविकास आघाड़ी नजर बनाई हुई है

महाराष्ट्र में कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि भाजपा को मंत्री विभागों के बंटवारे के बजाय देवेन्द्र फडणवीस को पालकमंत्री पद आवंटन प्रक्रिया तक शुरू से चले आ रहे नाराजगी के नाटक से निपटना होगा। महाराष्ट्र सरकार में जैसे ही शिवसेना को बहुमत मिला, यह अफवाह उड़ी कि शिंदे गुट को पालकमंत्री पद आवंटन में सम्मान मिलना चाहिए।
अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ये नाराजगी पालकमंत्री पद तक जारी रहेगी। आखिरकार, चूंकि महाविकास अघाड़ी के नेता भी महागठबंधन सरकार में चल रही अंदरूनी बहस पर नजर रख रहे हैं, इसलिए बीजेपी ज्यादा उग्र रुख अपनाती नहीं दिख रही है.











Leave a Reply