Location Gondia Maharastra
( रवि आर्य )
गोंदिया जिला परिषद में ‘ठेकेदार माफिया’ का राज
प्रशिक्षण । गोंदिया जिला परिषद में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई भी विभाग इससे अछूता नहीं है। यहां तक कि महिला एवं बाल कल्याण विभाग, जिसे सबसे पवित्र माना जाता है, वह भी भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। कांग्रेस के जिला परिषद सदस्य श्रीकांत घाटबांधे ने आयोजित प्रेस वार्ता में यह आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने और उन्हें आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाने के लिए 2020 से 2023 के बीच जिले की 8 तहसीलों में जूड़ो-कराटे प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाना था।
85 लाख रुपये के फर्जी भुगतान का आरोप
इस योजना के तहत विभिन्न जिला परिषद स्कूलों की 8500 छात्राओं को तीन स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना था। लेकिन हकीकत में कोई भी प्रशिक्षण नहीं हुआ, फिर भी 85 लाख रुपये जारी कर दिए गए।
धनराशि का वितरण इस प्रकार हुआ:
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मातोश्री बहुउद्देशीय संस्थान, नागपुर: ₹38.22 लाख
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गोंदिया जिला ताइक्वांडो एसोसिएशन: ₹28.82 लाख
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डीजीएम ताइक्वांडो स्पोर्ट एजुकेशन अकादमी, देवरी: ₹16.66 लाख
योजना के तहत हर छात्रा के बैंक खाते में ₹1000 की राशि सीधे जमा की जानी थी, लेकिन अधिकारियों और संस्थाओं की मिलीभगत से पूरा फंड हड़प लिया गया। जब यह मुद्दा जिला परिषद की आम सभा में उठाया गया, तो जवाब मिला कि “किसी भी अनुसूचित जाति की छात्रा ने आवेदन नहीं किया था”। श्रीकांत घाटबांधे ने मांग की कि संबंधित संस्थाओं से यह राशि वापस लेकर सभी 8500 छात्राओं के खातों में जमा की जाए।
अटल खेल महोत्सव के नाम पर भी घोटाला!
घाटबांधे ने आरोप लगाया कि अटल खेल महोत्सव के लिए 2022-23 और 2023-24 में 40 लाख रुपये वार्षिक खर्च का प्रावधान किया गया था। नियमों के अनुसार, यह पैसा केंद्रवार वितरित किया जाना चाहिए था, लेकिन बिना किसी निविदा प्रक्रिया के एक अलग बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर कर दिया गया।
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पैसा डेकोरेशन, ग्राउंड समतलीकरण और खेल सामग्री के नाम पर कैश और चेक से खर्च किया गया।
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दो वर्षों में भारी घोटाला हुआ, जिसकी विस्तृत जांच जरूरी है।
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700 करोड़ के जल जीवन मिशन में भारी भ्रष्टाचार!
केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना, जो मार्च 2025 तक पूरी होनी थी, अब 2025 के अंत तक बढ़ा दी गई है। इस योजना के तहत 700 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जो अब बढ़कर 918 करोड़ हो चुकी है, फिर भी गांवों में नल से पानी नहीं पहुंचा।
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गोंदिया जिले में 10-12 गांवों का ठेका एक ही ठेकेदार को दिया गया, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया।
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ठेकेदारों ने काम पेटी कांट्रैक्टर को बेच दिया, जिससे गुणवत्ता में भारी गिरावट आई।
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पाइप, टंकियों और प्लंबिंग सामग्री में घटिया स्तर का उपयोग किया गया।
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बार-बार शिकायतों के बावजूद ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया।
गर्मी के इस मौसम में ग्रामीणों को नल से जल नहीं, बल्कि टैंकरों से पानी लेना पड़ रहा है।
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श्रीकांत घाटबांधे ने मांग की कि पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इस दौरान युथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बाबा बागड़े भी मौजूद थे।











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