नांदेड़-नागपुर राजमार्ग दो घंटे तक जाम, बच्चू कडू के आंदोलन को मिला समर्थन
किसानों की चेतावनी – 2 अक्टूबर तक मांगें न मानी गईं तो मंत्रालय का करेंगे घेराव
नांदेड़ | संवाददाता – कुँवरचंद मंडले
नांदेड़ में सोमवार को किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। बच्चू कडू के नेतृत्व में राज्यभर में चल रहे कर्जमाफी आंदोलन को समर्थन देते हुए जिले के किसानों ने महादेव पिंपलगांव फाटा के पास नांदेड़-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। आंदोलन के दौरान मार्ग पर दो घंटे तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
कर्जमाफी से लेकर गारंटीकृत मूल्य तक मांगों का पुलिंदा
प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रमुख मांगें थीं –
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पूर्ण कर्जमाफी
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कृषि उत्पादों के लिए गारंटीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य
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मनरेगा जैसी रोजगार गारंटी योजना में कृषि कार्यों को शामिल करना
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बिजली बिलों में छूट
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सिंचाई सुविधाओं में सुधार
किसानों का कहना है कि राज्य सरकार ने अब तक केवल वादे किए हैं, ज़मीन पर कुछ भी नहीं बदला। उन्हें आज भी बैंक और साहूकारों के कर्ज के बोझ से जूझना पड़ रहा है।
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सड़क पर उतरा आक्रोश, दो घंटे तक जाम
महादेव पिंपलगांव फाटा पर किसान बड़ी संख्या में एकत्र हुए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यह केवल शुरुआत है। प्रदर्शन के कारण हाईवे पर दोनों ओर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन किसानों ने शांतिपूर्वक आंदोलन जारी रखा।
2 अक्टूबर को मंत्रालय पर मार्च की चेतावनी
प्रदर्शनकारी किसानों ने साफ कहा कि यदि 2 अक्टूबर तक सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे मुंबई के मंत्रालय की ओर मार्च करेंगे। “अब वादे नहीं, फैसले चाहिए,” ऐसा किसानों का कहना था।
किसानों का यह भी कहना है कि बच्चू कडू किसानों की असली आवाज़ बनकर सामने आए हैं, और जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाएगी, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
प्रशासन अलर्ट, सरकार पर बढ़ा दबाव
प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण पाया, लेकिन इस आंदोलन से सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राज्य के कई जिलों में प्रहार जनशक्ति पार्टी के समर्थन से किसान संगठन अब एकजुट हो रहे हैं।
किसानों की नाराज़गी सिर्फ कर्जमाफी तक सीमित नहीं
नांदेड़ से शुरू हुआ यह आंदोलन अब महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों तक पहुँच सकता है। किसानों की नाराज़गी सिर्फ कर्जमाफी तक सीमित नहीं है, यह राज्य की कृषि नीति, समर्थन मूल्य, और किसान कल्याण योजनाओं की विफलता पर भी सवाल उठा रही है। अगर सरकार समय रहते नहीं चेती, तो यह आंदोलन एक बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।
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