By SATARA BUREAU, Newsfirst24.in
Published: February 21, 2025, 02:08 PM
Emotional reunion of female leopard and four cubs, the cubs were left in the field
सातारा: महाराष्ट्र के सातारा जिले में गन्ने की कटाई के दौरान तेंदुए के चार छोटे शावकों के दिखने से हड़कंप मच गया। खेत में काम कर रहे किसान और गन्ना मजदूर पहले तो घबरा गए, लेकिन उन्होंने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। इसके बाद वन विभाग ने सतर्कता से काम लेते हुए एक योजनाबद्ध रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिससे मादा तेंदुआ और उसके बच्चों का पुनर्मिलन संभव हो सका।
कैसे शुरू हुआ मामला?
सातारा के एक गांव में किसान और मजदूर गन्ने की कटाई कर रहे थे, तभी उन्होंने चार छोटे तेंदुआ शावकों को देखा। तेंदुए के बच्चों को देखकर वहां मौजूद लोग डर गए और काम रोक दिया। हालांकि, उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए वन विभाग को इसकी जानकारी दी।
वन विभाग की सतर्कता और प्लानिंग
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके का मुआयना किया। टीम ने अनुमान लगाया कि मादा तेंदुआ अपने बच्चों की तलाश में जरूर वापस आएगी। ऐसे में उन्होंने बच्चों को एक कैरेट (बड़ी टोकरी) में रखकर उस जगह को सीसीटीवी निगरानी में ले लिया।
वन विभाग ने पूरी सतर्कता बरतते हुए आसपास के इलाके में मानव गतिविधियों को सीमित किया, ताकि तेंदुआ बेझिझक आ सके।
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मां और बच्चों का भावुक मिलन
रात करीब 10 बजे सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि मादा तेंदुआ अपने बच्चों को ढूंढते हुए वहां पहुंची। उसने पहले जगह को सूंघकर परखा और फिर एक-एक कर सभी शावकों को उठाकर जंगल की ओर ले गई। यह दृश्य न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सफल कदम था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सही रणनीति अपनाई जाए तो मानव और वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सकता है।
वन विभाग की सफलता
यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिससे यह साबित हुआ कि मादा तेंदुआ और उसके चारों बच्चे सुरक्षित हैं। वन विभाग की इस सफलता ने स्थानीय लोगों में भी जागरूकता बढ़ाई और यह संदेश दिया कि सही सूचना और संयम से वन्यजीवों को बिना किसी नुकसान के उनके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाया जा सकता है।
किसानों की जागरूकता काम आई
सातारा की यह घटना मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की एक बेहतरीन मिसाल है। वन विभाग की सूझबूझ और किसानों की जागरूकता के चलते न केवल चार नन्हे तेंदुओं की जान बची, बल्कि उनकी मां से भी उनका पुनर्मिलन हो सका। यह घटना वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकती है।











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