By नरेश सहारे, Newsfirst24.in
Published: February 22, 2025, 08:09PM
बेड़गांव वन परिक्षेत्र में वन्यजीवों का हो रहा शिकार, वन विभाग की लापरवाही उजागर

गडचिरोली: महाराष्ट्र के बेड़गांव वन परिक्षेत्र में जंगली जानवरों के शिकार का सिलसिला जारी है, लेकिन वन विभाग इस पर कोई सख्त कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा। ऐसा ही एक बड़ा मामला 20 फरवरी 2025 को सामने आया जब अर्जुनी वन विभाग को तेंदुए की खाल की तस्करी की गुप्त सूचना मिली। गोंदिया जिले के देवरी इलाके में जाल बिछाकर वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि तीन आरोपी फरार हो गए।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नकुल प्रहलाद सहारे (58), ग्राम कोहका और जितेंद्र कराडे (30), ग्राम कोटगुल, तहसील कोरची के रूप में हुई है। इनके पास से 20 लाख रुपए मूल्य की तेंदुए की खाल बरामद की गई। बताया जा रहा है कि ये खाल अवैध रूप से दूसरे राज्यों में बेची जानी थी।
गोंदिया वन विभाग ने की कार्रवाई, वडसा वन विभाग बेखबर
इस पूरी घटना की जानकारी अर्जुनी वन विभाग को मिली और उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। हैरानी की बात यह है कि शिकार वडसा वन विभाग के जंगल में हुआ, लेकिन वहां के अधिकारी और कर्मचारी इस पूरे मामले से अनजान बने रहे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों को 21 फरवरी 2025 को बेलगांव वन विभाग के अधिकारियों ने देसाईगंज न्यायालय में पेश किया। हालांकि, इस मामले पर वन विभाग के उप वनसंरक्षक वरुण बीआर ने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया।
वन विभाग की चुप्पी पर सवाल
जब पत्रकारों ने वरुण बीआर से इस मामले में सवाल पूछे तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और अभी छानबीन जारी है। उन्होंने पत्रकारों को यह भी कहा कि वह केवल सरकारी एजेंसियों को ही जानकारी देंगे, किसी प्राइवेट व्यक्ति को नहीं।
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वन विभाग की इस चुप्पी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं:
- वडसा वन विभाग के जंगल में हो रहे शिकार की जानकारी वहां के अधिकारी-कर्मचारियों को क्यों नहीं थी?
- अगर अर्जुनी वन विभाग समय पर कार्रवाई न करता, तो क्या यह मामला छिपा रहता?
- फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
जनता में आक्रोश
इस पूरे मामले में वडसा वन विभाग और बेलगांव वन परिक्षेत्र के अधिकारियों की निष्क्रियता पर जनता सवाल उठा रही है। वन्य जीवों के शिकार और उनकी तस्करी पर जब राज्य सरकार सख्त कानून लागू कर रही है, तो ऐसे मामलों में वन विभाग की उदासीनता समझ से परे है। अब देखना होगा कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए वन विभाग कब तक और क्या कार्रवाई करता है।











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