By नरेश सहारे, Newsfirst24.in
Published: February 02, 2025, 11:27 PM

गढ़चिरौली: माओवादियों ने की पूर्व सभापति की हत्या, इलाके में दहशत
गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में माओवादियों की दहशत एक बार फिर देखने को मिली। शनिवार सुबह भामरागढ़ तहसील के कियेर गांव में माओवादियों ने 45 वर्षीय पूर्व सभापति सुखराम मडावी की गला घोंटकर निर्मम हत्या कर दी। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव व्याप्त है, और ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।
हत्या के पीछे का कारण
मडावी का शव गांव के बाहर पड़ा मिला। घटनास्थल पर माओवादियों द्वारा छोड़े गए पर्चों में दावा किया गया है कि सुखराम मडावी पुलिस के लिए मुखबिरी कर रहे थे। पर्चे में उन पर यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने क्षेत्र में नए पुलिस सहायता केंद्र खोलने में पुलिस का सहयोग किया था और सुरक्षा बलों को लगातार जानकारी उपलब्ध करा रहे थे। हालांकि, प्रशासन ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
इलाके में नक्सलियों की बढ़ती सक्रियता
गढ़चिरौली जिले में नक्सली गतिविधियों में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते कुछ महीनों से माओवादी फिर से हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। यह हत्या वर्ष 2025 में नागरिक की हत्या का पहला मामला है, जिससे प्रशासन भी सतर्क हो गया है। हाल के दिनों में नक्सली गतिविधियां बढ़ने से पुलिस ने इलाके में गश्त और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।
पुलिस ने कहा- यह एक गंभीर मामला है

गढ़चिरौली पुलिस ने इस हत्या की पुष्टि की है और कहा कि मामले की जांच जारी है। पुलिस अधीक्षक अंकित गोयल ने बताया, “यह एक गंभीर मामला है। नक्सलियों द्वारा आम नागरिकों को निशाना बनाया जाना चिंताजनक है। हम इस घटना की गहराई से जांच कर रहे हैं और दोषियों को जल्द पकड़ने के लिए अभियान तेज किया जाएगा।” पुलिस के अनुसार, इलाके में नक्सल विरोधी अभियान को और अधिक सख्ती से चलाने की योजना बनाई जा रही है।
स्थानीय लोगों में दहशत
इस घटना के बाद से कियेर गांव समेत आसपास के ग्रामीणों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नक्सली अब फिर से निर्दोष लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिससे उनका जीवन असुरक्षित हो गया है। कुछ ग्रामीणों का यह भी मानना है कि माओवादियों की गतिविधियां बढ़ने से क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
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सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

इस घटना के बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। भामरागढ़ और उसके आसपास के गांवों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जल्द ही अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा सकते हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
गढ़चिरौली जिले में माओवादी लंबे समय से सक्रिय हैं और समय-समय पर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह नक्सली हिंसा पर नियंत्रण करे और ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना पैदा करे।











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