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गांधी सागर उद्यान: 500 परिवारों का घर बना, यहां एक्सरसाइज करते ही हो जाता है हेल्थ इंश्योरेंस  

गांधी सागर उद्यान: 500 परिवारों का घर, यहां एक्सरसाइज करते ही हो जाता है हेल्थ बीमा
  1.  देश में अनोखी पहल यहां आने वाले हर सख्स का हेल्थ इंश्योरेंस संस्था ने किया
  2.  यहां आने वाले एक-दूसरे के सुख-दु:ख के साथी बनकर परिवार का हिस्सा बनते गए
  3. हेल्दी रहने के लिए यहां विशेषज्ञ कर रहे हैं काम

By health reporter , Newsfirst24.in

Published: 06 November , 2024, 08:18 AM

Gandhi Sagar Park: Home to 500 families, health insurance is available just by exercising here

गांधी सागर उद्यान: 500 परिवारों का घर, यहां एक्सरसाइज करते ही हो जाता है हेल्थ बीमा

गांधी सागर उद्यान कैसे 500 लोगों का परिवार बन गया उसकी कहानी

गांधी सागर उद्यान कैसे 500 परिवारों का घर बन गया, इसकी कहानी रोचक है। यहां कुछ लोग एक्सरसाइज करने आते थे। धीरे-धीरे वह एक दूसरे से ऐसे जुड़े की 500 लोगों का परिवार बन गया।

एक-दूसरे के सुख-दु:ख के साथी बन गए। पहले मकसद था अपनी हेल्थ का ध्यान रखना। बाद में गांधी सागर उद्यान कल्याणकारी संस्था बनाकर परिवार को एक संगठन की शक्त दे दी। यहां आने वाले बुजुर्ग भले ही अपने घर में शांत रहते हों मगर यहां दो से तीन घंटे बैठकर आपस में खूब ठहाके लगाते हैं।

गांधी सागर उद्यान कल्याणकारी संस्था ने एक अनोखा प्रयोग कर यहां आने वाले 500 सख्स का हेल्थ इंश्योरेंस करवा दिया। मतलब यहां एक्सरसाइज करते ही आपका हेल्थ इंश्योरेंस संस्था करवा देती है।

गांधी सागर उद्यान: 500 परिवारों का घर, यहां एक्सरसाइज करते ही हो जाता है हेल्थ बीमा

असली मकसद हर तरह से हेल्दी रहें

गांधी सागर उद्यानउद्यान संस्था का उद्देश्य है कि गार्डन में आने वाला हर शख्स एक्सरसाइज से हेल्दी रहें और यदि इसके बाद भी कुछ होता है तो हेल्थ इंश्योरेंस से उन्हें हेल्दी होने में आसानी हो जाएगी। गांधी सागर उद्यान कल्याणकारी संस्था देश की पहली ऐसी संस्था बन गई जिसने इस स्तर पर सामूहिक हेल्थ इंश्योरेंस करवाया है।

2010 में हुई शुरुआत

गांधी सागर उद्यान आज नागपुर में अपनी खुबसूरती के लिए जाना जाता है। यह शहर के बीचों बीच अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। आज जिस चमचमाती स्थिति में है उद्यान है वह ऐसा पहले नहीं था। उसके पीछे भी यहां आने वाले लोगों की विशेष कहानी है।

यहां कुछ लोग रोजाना एक्सरसाइज करने आते थे उनका गांधी सागर उद्यान से ऐसे अटैचमेंट हुआ कि उन्होंने बिना सरकारी सहायता के इसे घर के गार्डन के रूप में विकसित करना शुरू कर दिया।

अपने स्तर पर पेड़ लगाए और मेंटेन करने लगे

गांधी सागर उद्यान में आने वाले लोग अपने स्तर पर अलग-अलग तरह के पौधे लाकर गार्डन में लगाते रहे। उसकी देखभाल की जिम्मेदार भी उठाई। ऐसे ही प्रयासों से गांधी सागर उद्यान एक खूबसूरत जगह में बदल गया।

इसके बाद नागपुर एनएमसी से भी गांधी सागर उद्यान के सदस्यों ने सहायता लेना शुरू कर दी। अधिकारी यहां आकर लोगों के प्रयासों को सराहने लगे और उसे निखारने में हर संभव सहायता भी की।

हर मुसीबत में सब एक साथ हैं

गांधी सागर उद्यान: 500 परिवारों का घर, यहां एक्सरसाइज करते ही हो जाता है हेल्थ बीमा

गांधी सागर उद्यान में आने वाले लोग केवल एक्सरसाइज तक ही सीमित नहीं है। यदि किसी के घर में कोई शादी हो या कोई मुसीबत आई हो तो सभी सदस्य एकजुट होकर उसका समाधान करते हैं।

एक साथ त्योहार मनाने का सिलसिला शुरू कर दिया

गांधी सागर उद्यान कल्याणकारी संस्था ने अपने सदस्यों के बीच हर दिन खुशियां ढूंढ़ना शुरू कर दी। आए दिन किसी न किसी सदस्य का जन्मदिन मनाने से हुई शुरुआत अब देश में आने वाली जयंती और बड़े त्योहारों को साथ मनाने तक पहुंच गई।

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बीमार होने पर इलाज भी करवाते हैं

गांधी सागर उद्यान में आने वाले लोगों का हेल्थ चेकअप भी यहां आए दिन होता रहता है। इसके बाद भी यदि कोई बीमार है और वह इलाज करवाने में सक्षम नहीं है तो गांधी सागर कल्याणकारी संस्था ने ऐसे कई लोगों का आपस में चंदा कर इलाज भी करवाया और कई सदस्यों के घर भी चलाए।

गांधी सागर झील की अन्य जानकारी

देश की पहली संस्था जिसने गार्डन में आने वालों का इंश्योरेंस करवाया

गांधी सागर कल्याणकारी संस्था 2010 में स्थापित की थी। हमने पहले यहां आने वाले लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना शुरू किया। इसके बाद गार्डन को संवारने में एक-दूसरे का सहयोग लिया। हमने गार्डन में अरोग्य शिविर से लेकर हेल्थ चेकअप शुरू किए। इसके बाद हमने यहां आने वाले 500 लोगों का हेल्थ इंश्योरेंस करवाकर देश में अपने तरह का रिकॉर्ड बनाया है। इस सबके में खास बात यह है कि हम सभी एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी हैं जो आज के समय हमें बड़ी बात लगती है।

-राजेश कुंभलकर, अध्यक्ष, गांधी सागर उद्यान संस्था, नागपुर

 मैं यहां के दोस्तों के कारण 72 साल में भी फिट हूं

मैं 72 साल क्रास कर चुका हूं। मैं पेशे से वकील हूं। यहां बने मेरे दोस्तों के कारण आज भी मैं पूरी तरह से फिट हूं। गार्डन में आने के बाद जो मेरी फैमली बनी है वह सबसे बड़कर है। मैं भले ही घर में परिवार के सदस्यों से कम बात कर पाता हूं मगर यहां आकर घंटों हम एक-दूसरे का सुख-दूख बांटते हैं। यहां आने के बाद नींद बहुत अच्छी आती है और इस उम्र में भूख भी जमकर लगती है।

-मोहसिन नकवी

यहां आकर जीवन जीना सीखा

मैं पहले आए दिन बीमार रहता था, मगर यहां आने के बाद जब मेरे दोस्त बने तो बीमारी कब दूर हो गई पता नहीं चला। यही कारण है कि हम अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी खींचकर यहां ले आते हैं ताकि वह जीवन जीना सीखें।

-पंकज राऊत

 

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