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भोलेनाथ की जटाओं से बहती गंगा, सदियों से अनसुलझा है पोंगेझरा का रहस्य, देखें वीडियो

भोलेनाथ की जटाओं से बहती ‘गंगा’, सदियों से अनसुलझा है पोंगेझरा का रहस्य, देखें वीडियो

By रवि आर्य, Newsfirst24.in

Published: February 26 , 2025, 03:51 PM

गोंदिया | महाशिवरात्रि का महापर्व आते ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। भगवान शिव की पूजा-अर्चना, अभिषेक और रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि शिव साधना से धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। गोंदिया जिले के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में भी इस अवसर पर भक्तों का रैला उमड़ा हुआ है।

लेकिन, इस पावन पर्व पर एक ऐसा रहस्यमय स्थान भी है, जहां भोलेनाथ की महिमा से जुड़ी एक अद्भुत गाथा सुनाई देती है। गोंदिया से करीब 30 किलोमीटर दूर गोरेगांव तहसील के बोड़ूंदा गांव के पास स्थित ‘पोंगेझरा’ का स्वयंभू गौमुख झरना भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए वर्षों से रहस्य बना हुआ है।

गौमुख झरने का रहस्य: कहां से आता है यह जल?

भोलेनाथ की जटाओं से बहती गंगा, सदियों से अनसुलझा है पोंगेझरा का रहस्य पोंगेझरा में स्थित गौमुख झरना अपने आप में एक अनसुलझी पहेली है। इस झरने से सालभर शुद्ध जल प्रवाहित होता रहता है, लेकिन इसका वास्तविक स्रोत आज तक कोई नहीं खोज पाया। आसपास के इलाके में न तो कोई जलस्रोत है और न ही कोई नदी-नाला, इसके बावजूद यह झरना लगातार बहता रहता है।

मंदिर के पुजारी और स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि यह जल स्वयं भोलेनाथ की जटाओं से प्रवाहित हो रहा है, ठीक वैसे ही जैसे गंगा भगवान शिव के मस्तक से निकलकर धरती पर अवतरित हुई थीं। पुजारी बताते हैं कि उनके पूर्वज भी यही मानते आए हैं कि यह जल अलौकिक शक्तियों से युक्त है और इसके सेवन से कई बीमारियां दूर हो जाती हैं।

पोंगेझरा: आस्था, इतिहास और प्रकृति का संगम

भोलेनाथ की जटाओं से बहती गंगा, सदियों से अनसुलझा है पोंगेझरा का रहस्य पोंगेझरा क्षेत्र ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि दशकों पूर्व यहां गोंड राजा का महल हुआ करता था, और उनके कुलदेवता भगवान शिव का प्राचीन मंदिर यहां स्थित है।

यह स्थान नागझिरा टाइगर रिजर्व की सीमा में आता है, इसलिए भक्तों को सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक ही प्रवेश की अनुमति मिलती है। ऊँची पहाड़ी पर स्थित भगवान शिव का यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर जल

गौमुख झरने से निकलने वाले जल को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस जल के सेवन से कई गंभीर बीमारियों में लाभ होता है। यही कारण है कि श्रद्धालु इस जल को प्रसाद रूप में अपने साथ ले जाते हैं।

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पुरातन काल से जुड़ी आस्था

भोलेनाथ की जटाओं से बहती ‘गंगा’, सदियों से अनसुलझा है पोंगेझरा का रहस्य मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, पोंगेझरा में प्राचीन समय में करण शाह नामक राजा का शासन था, और भगवान शिव उनके कुल देवता थे। पुजारी बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने भी इस जल के रहस्य को जानने का प्रयास किया, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला। यह स्थान चमत्कारी ऊर्जा और शिव कृपा से परिपूर्ण माना जाता है।

शिवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़

महाशिवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। दूर-दराज से श्रद्धालु यहां भगवान शिव का अभिषेक करने आते हैं और गौमुख झरने के जल का आचमन कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

धार्मिक आस्था और पर्यटन को बढ़ावा

गोंदिया जिले का यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। सरकार और प्रशासन यदि इस स्थल के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर ध्यान दे, तो यह धार्मिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है।

भोलेनाथ की जटाओं से अवतरित ‘गंगा’

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह गौमुख झरना भगवान शिव की कृपा से सदियों से बहता आ रहा है। लोग इसे भोलेनाथ की जटाओं से निकली गंगा मानते हैं, और इसकी पवित्रता में अटूट श्रद्धा रखते हैं।

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