By रवि आर्य, Newsfirst24.in
Published: December 06 , 2025, 05:30 PM
- नगर कीर्तन यात्रा पर बरसाए फुल , गुरबाणी गूंजी
- गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाशोत्सव : शोभायात्रा मैं सैकड़ो की भीड़ उमड़ी

गोंदिया। अदम्य साहस , शौर्य वीरता के प्रतीक सिख धर्म के दशम गुरु एवं खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के प्रकाश उत्सव पर्व पर गोंदिया शहर में शोभायात्रा निकाली गई।
नगर कीर्तन में पंज प्यारों की अगवाई में साहिब श्री गुरु ग्रंथ का एक स्वरूप फूलों से सजी गाड़ी में सुशोभित रहा।
शोभायात्रा में आगे चल रहे दर्जनों सेवादार ने पूरी सड़क पर झाड़ू लगाते रहे तथा शोभायात्रा मार्ग की सड़कों को सेवादारों ने पानी से धोया तत्पश्चात नगर कीर्तन यात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा करते हुए हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया गया।
महिला संगत गुरबाणी सबद कीर्तन करते हुए सेवा का संदेश देते हुए साथ चली ।
प्रमुख चौक चौराहों पर भव्य आतिशबाजी की गई समाज के लोगों ने सड़क पर साफ सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया।
युद्ध कलाओं का सड़कों पर प्रदर्शन कर चौंकाया

गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने से भी पीछे नहीं रहे।
बलिदानी परंपरा में अदिव्तीय स्थान रखने वाले गुरु गोबिंद सिंह ने घुड़सवारी , तीरंदाजी , तलवारबाजी इत्यादि युद्ध कलाओं में महारत हासिल की थी।
अत्याचार और न्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी का वाक्य ” सवा लाख से एक लडाऊ तां गुरु गोबिंद सिंह नाम धराऊं ” सैकड़ो वर्षों बाद आज भी प्रेरणा और हिम्मत देता है।
शोभायात्रा के मौके पर ” वीर खालसा ग्रुप ” के जत्थों ने प्रमुख चौक चौराहों पर एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज युद्ध कलाओं का प्रदर्शन दिखाकर लोगों को चौंकाया ।
आंखों पर पट्टी और पूरा मुंह कपड़े से ढांककर , चार अलग-अलग दिशाओं में बैठे सेवादारों के सिर पर रखे नारियल को काटकर लोगों को अचंभे में डाल दिया वहीं तलवार और अन्य शास्त्र कलाओं का सड़कों पर प्रदर्शन दिखाकर लोगों को चौंकाया।
बता दें कि महान योद्धा गुरु गोबिंद सिंह जी का संदेश था- तलवार , जुल्म के खिलाफ और दीन दुखी की रक्षा के लिए ही उठनी चाहिए।
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धर्म की रक्षा के लिए पूरे परिवार का कर दिया था बलिदान

गुरु गोबिंद सिंह जी भारत के इतिहास ही नहीं बल्कि विश्व के एक महानतम व्यक्तित्व है , उन्होंने सिख धर्म को मजबूती प्रदान करने के साथ , सच्चाई और धर्म के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया था।
युद्ध कौशल के अलावा एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ वे एक निर्भयी योद्धा , कवि , दार्शनिक लेखक भी थे उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की थी।
धर्म की रक्षा के लिए मुगलों से लड़ते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी
अपने धर्म की रक्षा के लिए मुगलों से लड़ते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पूरे परिवार का बलिदान कर दिया था।
उनका जीवन त्याग बलिदान राष्ट्रभक्ति सेवा और समाज के उद्धार का प्रतीक था।
गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती को ” प्रकाश पर्व ” के नाम से जाना जाता है यह दिन सिखों के लिए बेहत पवित्र और महत्वपूर्ण होता है इस दिन गुरु की बताई बातों और शिक्षाओं को याद किया जाता है इस अवसर पर गुरुद्वारों की भव्यता भी देखते बनती है।
सेवा भाव से जगह-जगह लंगर लगाए जाते हैं और शोभायात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के बीच आल्पोहार का वितरण भी किया गया।
नगर कीर्तन में हजारों की संख्या में सिख श्रद्धालु और विद्यार्थी शामिल हुए।











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