By DELHI BUREAU, Newsfirst24.in
Published: February 25, 2025, 02:38 PM

Kejriwal government’s liquor policy has resulted in a loss of Rs 2,000 crore, CAG report reveals
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर CAG (Comptroller and Auditor General) की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों और घोटालों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, AAP सरकार की गलत नीतियों और लापरवाह फैसलों से सरकारी खजाने को 2,002.68 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।
शराब घोटाले के 10 बड़े खुलासे:
1️⃣ 2000 करोड़ का राजस्व नुकसान – गलत फैसलों, लाइसेंस सरेंडर के बावजूद नए टेंडर न निकालने और लाइसेंस फीस में छूट देने से सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ।
2️⃣ लाइसेंस नियमों का उल्लंघन – ऐसे थोक विक्रेताओं को लाइसेंस मिले, जिनका खुदरा विक्रेताओं या निर्माणकर्ताओं से सीधा संबंध था, जिससे पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
3️⃣ थोक विक्रेताओं को मनमाने लाभ – सरकार ने प्रॉफिट मार्जिन 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया, जिससे बाजार में कुछ कंपनियों का एकाधिकार बढ़ा।
4️⃣ बिना जांच के लाइसेंस जारी – वित्तीय जांच और पात्रता मानकों को दरकिनार कर कई कमजोर कंपनियों को लाइसेंस दिए गए, जिससे घोटाले की आशंका बढ़ी।
5️⃣ विशेषज्ञों की सिफारिशों को नजरअंदाज किया – सरकार ने अपनी ही विशेषज्ञ समिति की सलाह को दरकिनार कर मनमाने फैसले लिए।
6️⃣ शराब बाजार पर कुछ कंपनियों का नियंत्रण – नई नीति के तहत 849 शराब वेंडों के लिए केवल 22 कंपनियों को लाइसेंस दिए गए, जिससे एकाधिकार और कार्टेल बनने की स्थिति पैदा हुई।
7️⃣ कैबिनेट मंजूरी के बिना फैसले – शराब नीति से जुड़ी कई बड़ी छूट बिना कैबिनेट मंजूरी और उपराज्यपाल की सहमति के दी गईं।
8️⃣ अवैध शराब वेंड खोलने की मंजूरी – कई लाइसेंस MCD और DDA से अनुमति लिए बिना रिहायशी इलाकों में जारी कर दिए गए, जिन्हें बाद में बंद करना पड़ा।
9️⃣ शराब की कीमतों में हेरफेर की छूट – थोक विक्रेताओं को अपनी मनमर्जी से शराब की कीमतें तय करने दी गईं, जिससे पारदर्शिता खत्म हुई।
🔟 गुणवत्ता जांच की अनदेखी – CAG रिपोर्ट के मुताबिक, शराब की गुणवत्ता जांच के नियमों को नजरअंदाज किया गया, जिससे जनता की सुरक्षा से समझौता हुआ।
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प्रशासनिक क्षमता पर गंभीर सवाल
CAG रिपोर्ट ने दिल्ली की आबकारी नीति में भारी अनियमितताओं का खुलासा किया है। रिपोर्ट के ये तथ्य केजरीवाल सरकार की नीति-निर्माण प्रक्रिया, पारदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।















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