By Arvind Jadhav, Newsfirst24.in
Published: December09, 2024, 06:04 PM
Know why Rahul Narvekar became the Speaker of Maharashtra Legislative Assembly
राहुल नार्वेकर के रूप में फिर एक बार सदन को मिला युवा सभापति
विधानसभा के तीन दिवसीय सत्र के आखिरी दिन राहुल नार्वेकर को नई महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में एकबार फिर मौका दिया गया है। आखिर उन्होंने ही क्यों यह मौका मिला इसके कई कारण हैं। राहुल नार्वेकर पिछली विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
साथ ही अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिवसेना और एनसीपी पार्टी की मान्यता जैसे गंभीर मुद्दों को भी संभाला। उन्होंने पिछली विधानसभा को भी कई मुद्दों पर संतुलित किया, खासकर जब उन्हें विधानसभा के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था, उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण उन्हें सदन के अध्यक्ष के रूप में फिर से चुना गया है।
मूल रूप से यह नाम भाजपा द्वारा सुझाया गया था

राहुल नार्वेकर को निर्विरोध चुना गया क्योंकि किसी ने भी अध्यक्ष पद के लिए आवेदन नहीं किया था। मूल रूप से यह नाम भाजपा द्वारा सुझाया गया था, विपक्ष की संख्या की कमी होने के कारण किसी ने भी उम्मीदवारी नहीं भरी, इसलिए प्रभारी अध्यक्ष कालिदास कोलंबकर ने आज राहुल नार्वेकर को अध्यक्ष पद का प्रभार सौंप दिया गया।
बीजेपी की ओर से भी मंत्री पद के लिए एक नाम चर्चा में था
राहुल नार्वेकर मुंबई की कोलाबा विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनका नाम पर भी मंत्री पद के लिए चर्चा में था लेकिन अब चूंकि उन्हें स्पीकर के पद पर बैठने से उनका नाम मंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गया है।
भले ही इस बार विधानसभा में बीजेपी महागठबंधन बहुमत में है, लेकिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि इस बार विधानसभा काफी विवादास्पद होगी। लेकिन पिछले विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में उनके अनुभव कों देखकर लगता है कि वह सत्ताधारी और विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखेंगे।
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आदित्य ठाकरे ने अवैध सरकार चलाने का आरोप लगाया
राहुल नार्वेकर को सभी पार्टियों ने बधाई दी है, लेकिन शिवसेना उद्धव ठाकरे के युवा नेता आदित्य ठाकरे ने नाराजगी जाहिर की है। राहुल नार्वेकर पर उन्होंने पिछले विधानसभा कार्यकाल में असंवैधानिक सरकार चलाने का आरोप लगाया है। पिछली विधानसभा में शिवसेना की मान्यता को लेकर बड़ी बहस हुई थी और कोर्ट ने फैसला भी स्पीकर को सौंप दिया था।
उद्धव ठाकरे की पार्टी शिव सेना के पक्ष में अप्रत्याशित फैसला आने कारण उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे पिता-पुत्र ने जनता की अदालत में गुहार भी लगाई, यह कार्यकाल महाराष्ट्र की विधानसभा इतिहास में काफी संवेदनशील रहा था।
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