By प्रेम उपाध्याय, Newsfirst24.in
Published: December 03, 2025, 04:41 PM
- प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से शुरू होने वाला महाकुंभ अपने दिव्यता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इस बार, तैयारियों को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर साधु-संतों की नाराजगी का माहौल बनता दिख रहा है।

प्रयागराज। कुंभ मेले में जमीन आवंटन को लेकर साधु-संत लगातार प्रशासन के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। साधु अयोध्या रामगढ़ी ने इस स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि साधु-संतों के लिए कैंप और स्थान की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है, जिससे उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
2 जनवरी तक कई आखाड़ों को जमीन का आवंटन नहीं
2 जनवरी तक स्थिति यह है कि कई अखाड़ों और आम साधु-संतों को जमीन आवंटित नहीं की गई है। प्रशासन ने कुंभ क्षेत्र को सेक्टर में विभाजित तो कर दिया है, लेकिन यह तय नहीं हो पाया है कि किसे कहां जमीन मिलेगी।
हंगामा और अधिकारियों की अनुपस्थिति

साधु-संतों का कहना है कि उनकी शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय अधिकारी अपनी सीट से गायब हैं। जब निर्देश है कि किसी भी साधु-संत को परेशानी नहीं होनी चाहिए, तो यह लापरवाही चिंताजनक है। नाराज साधु-संतों ने प्रशासन कार्यालय में हंगामा भी किया।
सरकारों पर सवाल
महाकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने का वादा न केवल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बल्कि केंद्र सरकार ने भी किया है। लेकिन साधु-संतों की नाराजगी और जमीन आवंटन में हो रही देरी से इन तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
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क्या महाकुंभ 2025 वास्तव में दिव्य और भव्य होगा?

महाकुंभ भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का प्रतीक है। ऐसे में अगर साधु-संतों को परेशानी होती है, तो इसका प्रभाव आयोजन की छवि पर भी पड़ सकता है। सवाल यह है कि प्रशासन इन समस्याओं को समय रहते कैसे सुलझाएगा और क्या महाकुंभ 2025 अपनी दिव्यता और भव्यता को बनाए रखने में सफल होगा?
प्रयागराज महाकुंभ से जुड़े इस मुद्दे पर हर किसी की नजर है। साधु-संतों की समस्याओं का समाधान प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि यह आयोजन सफल और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
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