By Beauro Report, Newsfirst24.in
Published: February 16, 2025, 06:43 PM
प्रयागराज। धर्म और आस्था के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाने की नई योजना सामने आई है – “डिजिटल स्नान”! जी हाँ, अब महाकुंभ में आपको जाने की ज़रूरत नहीं, बस ₹500 भेजिए, अपनी फोटो व्हाट्सएप कीजिए, और आपकी तस्वीर को गंगा में डुबोकर शाही स्नान करवा दिए जाएंगे। इससे आपको महाकुंभ में स्नान का लाभ मिल जाएगा। ऐसे एड देकर लाखों लोगों को ठगा गया।
कैसे हो रही है लोगों की भावनाओं से ठगी?
1. पवित्र स्नान का ठेका?
महाकुंभ स्नान का महत्व केवल शरीर को पानी में भिगोने तक सीमित नहीं है। यह एक आध्यात्मिक और धार्मिक अनुभव होता है, जिसमें आत्म-शुद्धि और आस्था का मेल होता है। लेकिन अब कुछ चालाक लोग इसे “ऑनलाइन सेवा” की तरह बेचने लगे हैं।
2. क्या तस्वीर गंगा में नहाने से पाप धुल जाते हैं?
अगर ऐसा होता, तो बड़े-बड़े पंडित और संत भी डिजिटल स्नान से ही मोक्ष पा लेते! लेकिन असली आस्था तो स्वयं वहां जाकर श्रद्धा और संकल्प के साथ स्नान करने में है।
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3. ₹500 में मुक्ति?
यह वही मानसिकता है जिससे लोग नकली तांत्रिकों और बाबाओं के जाल में फंसते हैं—”बस इतना दान करो और सब संकट दूर!” अगर मोक्ष इतनी सस्ती चीज़ होती, तो हर कोई पैसों से स्वर्ग खरीद लेता!
लोगों को सावधान रहने की ज़रूरत
कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या स्नान सिर्फ पैसे देकर पूरा नहीं हो सकता।
महाकुंभ एक पवित्र अवसर है, इसे ठगी का धंधा न बनने दें।
सोच-समझकर निर्णय लें और ऐसे अंधविश्वासों में न फंसें।











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