By NAGPUR BUREAU, Newsfirst24.in
Published: February 02, 2025, 10:00 AM
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Drug trade in Nagpur Central Jail, see eye-witness report
नागपुर सेंट्रल जेल का काला सच: स्वस्थ कैदी भी हो रहे बीमार, जेल प्रशासन खुद बेच रहा तंबाकू से लेकर बीड़ी सिगरेट
आंखो देखे हाल पर आधारित खबर
यह रिपोर्ट नागपुर सेंट्रल जेल में हो रही अवैध गतिविधियों और नियमों के उल्लंघन को उजागर करने के लिए तैयार की गई है। इसमें शामिल जानकारी प्रत्यक्षदर्शियों और वहां रह चुके लोगों के आंखों देखे हाल पर आधारित है। उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है।
जेल में हर जगह धूम्रपान का साम्राज्य
- जेल में तंबाकू और धूम्रपान का इस्तेमाल आम बात हो गई है।
- एक बैरक में 60-70 लोगों की जगह 200-200 कैदियों को रखा जाता है, ऐसे में लेटना तो दूर बैठने में भी परेशानी हो रही है
- जो कैदी धूम्रपान नहीं करते, वे भी इस माहौल में लगातार धुएं में रहने से बीमार पड़ रहे हैं।

पूरे देश में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने और खासतौर पर तंबाकू के उत्पादों पर महाराष्ट्र में प्रतिबंध है। पकड़े जाने पर जुर्माने के साथ 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। मगर इसके उलट, नागपुर सेंट्रल जेल में प्रवेश से लेकर अंदर के बैरकों तक, सुबह से रात तक नशे के धुएं में समाया हुआ है।
स्थिति यह है कि यह नशे का कारोबार खुद जेल प्रशासन द्वारा अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इसके कारण सबसे बुरी हालत उन कैदियों की है, जो नशा नहीं करते, क्योंकि वे मजबूरी में धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो गए हैं। खासकर अस्थमा और एलर्जी से परेशान कैदियों की हालत और भी बुरी है, जो ऐसे माहौल में जीने को मजबूर हैं।
जेल प्रशासन खुद बीड़ियों के बंडल बेच रहा है

यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जेल प्रशासन ही अधिकृत रूप से कैदियों को केंटीन में बीड़ियों के बंडल बेच रहा है। स्थिति यह है कि जेल की अधिकांश आमदनी इसी से जुड़ी हुई है। ऐसे में जब कैदियों को बीड़ी के बंडल सप्लाई किए जा रहे हैं, तो बैरक में धूम्रपान पर प्रतिबंध की बात बेमानी हो जाती है।
बैरकों में जानवरों की तरह ठूंस रहे हैं कैदियों को
एक बैरक में 60-70 लोगों की जगह 200-200 कैदियों को रखा जाता है, ऐसे में लेटना तो दूर बैठने में भी परेशानी हो रही है। शुरुआती आमद बैरक हर दिन आने वाले मरीजों को जानवरों की तरह ठंस दिया जाता है। जेल प्रशासन के पास इसके कोई नियम नहीं है कि आखिर इस बैरक में कितने कैदी ही रह पाएंगे। हालात यह है कि यहां सोना तो दूर बैठना भी मुश्किल होता है।
कैदियों के बीच बीड़ियों की सबसे ज्यादा मांग
सेंट्रल जेल में जो कैदी नशे के आदी हैं और वे यहां अपने हिसाब का नशा नहीं खरीद सकते, वे बीड़ी से काम चलाते हैं। ऐसे में कैदियों के बीच बीड़ी की सबसे ज्यादा मांग है। किसी भी काम के लिए कैदी को एक बीड़ी का बंडल दीजिए, काम हो जाएगा।
अधिक पैसा कमाने के लिए कैदियों के बीच बीड़ी की काला बाजारी
जेल में बीड़ी और तंबाकू की मांग इतनी ज्यादा है कि इन्हें ऊंची कीमतों पर बेचा जाता है।- जो बीड़ी का बंडल बाहर ₹100 में मिलता है, उसे जेल में ₹1000 से ₹5000 तक बेचा जाता है।
- जिन कैदियों के पास पैसे नहीं होते, वे छोटे-मोटे काम करके बीड़ी खरीदते हैं।
केंटीन में सबसे ज्यादा मांगा जाने वाला उत्पाद
नागपुर सेंट्रल जेल की केंटीन में अगर कोई उत्पाद सबसे ज्यादा मांगा जाता है, तो वह बीड़ी है। हालांकि, यहां सिगरेट और अन्य नशे के सामान भी अनधिकृत रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी कीमत हर कैदी के बस की बात नहीं होती।
जेल अस्पताल के अनुसार, कई कैदी इन बीमारियों से ग्रस्त हैं:
- कैंसर
- दिल की बीमारियां
- अस्थमा और ब्रोंकाइटिस
- किडनी और लिवर फेल्योर
- मानसिक तनाव और डिप्रेशन
- गर्भवती महिला कैदियों में समय से पहले जन्म और शिशु स्वास्थ्य समस्याएं
धूम्रपान के लिए देशभर में ये नियम, मगर जेल में नहीं
भारतीय दंड संहिता की धारा 278 के तहत, किसी भी सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करने पर जुर्माने का प्रावधान है। सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट और बीड़ी पीना अपराध माना जाता है। तंबाकू के खतरे से बचाने के लिए सरकार ने सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध और उनके व्यापार को विनियमित करने का कानून 2003 में बनाया। सरकार ने इस नियम को सख्ती से लागू करने की कोशिश की है, लेकिन अफसोस है कि नागपुर सेंट्रल जेल में इसका पालन नहीं हो रहा है।
सालों से प्रयास हो रहे हैं, मगर कोई असर नहीं
जेल में बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सालों से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इन पर प्रतिबंध नहीं लग सका क्योंकि इनसे होने वाली आमदनी बहुत बड़ी है। देशभर में ऐसे प्रयास चल रहे हैं, लेकिन जेल प्रशासन खुद इस नशे का कारोबार कर रहा है, जो कैदियों की सुधार प्रक्रिया के खिलाफ है।
स्मोकिंग जोन का नियम, मगर जेल में नहीं
देशभर में कई स्थानों पर धूम्रपान करने के लिए स्मोकिंग जोन बनाए गए हैं ताकि इसका असर आम लोगों पर न पड़े। लेकिन जेल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। यही कारण है कि कैदी सुबह से लेकर रात तक धूम्रपान करते रहते हैं जब तक उनका स्टॉक खत्म नहीं हो जाता। और एक बार स्टॉक खत्म होने के बाद उसे लेने की तलाश और बढ़ जाती है।
जेल में धूम्रपान ही नहीं, बल्कि नशीले पदार्थ भी पहुंच रहे हैं
- सिर्फ बीड़ी ही नहीं, बल्कि अन्य नशीले पदार्थ भी कैदियों तक गुप्त रूप से पहुंचाए जा रहे हैं।
- कुछ जेल अधिकारी कैदियों को मादक पदार्थ लाकर दे रहे हैं, जिससे जेल के अंदर अपराध और हिंसा बढ़ रही है।
- ड्रग्स की लत के कारण कई कैदी मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके हैं।
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कानूनों का उल्लंघन और कैदियों की सेहत से खिलवाड़ पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत
नागपुर सेंट्रल जेल में नशे का कारोबार और उसकी वजह से हो रही स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर चिंता का विषय हैं। जेल प्रशासन द्वारा कानूनों का उल्लंघन और कैदियों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। यदि इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका असर और बढ़ सकता है। सरकार और संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे इस पर सख्त कदम उठाएं और जेल के माहौल को सुधारें। यह सुधार न केवल कैदियों के लिए, बल्कि समाज के लिए भी आवश्यक है।
















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