By MUMBAI BUREAU, Newsfirst24.in
Published: December02, 2024, 04:27 PM
- -महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए बीजेपी ने दोनों को पर्यवेक्षक बनाया
- -शपथ ग्रहण की तैयारियों जोरों पर, शिंदे की नाराजगी चरम पर

How will the Maharashtra government be formed: Even Nirmala Sitharaman and Vijay Rupani will decide
मुंबई। महाराष्ट्र में चुनाव परिणाम के 9 दिन बाद भी अब तक सरकार के गठन की रूप-रेखा तय नहीं हो पाई है। सीएम कौन बनेगा इसी पर पेंच बाकी है। एकनाथ शिंदे का 9 दिन बाद भी रूठने का दौर जारी है। हर दिन एक नया पेंच आ जाता है। इस सबके बीच में 5 दिसंबर को महाराष्ट्र सरकार की शपथ ग्रहण समारोह होना तय हो चुका है। भाजपा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी को पर्यवेक्षक बनाया है। दोनों नेता मंगलवार को मुंबई पहुंचेंगे। इन दोनों की मौजूदगी में ही विधायक दल की बैठक होगी जिसमें महाराष्ट्र के सीएम का नाम तय होगा।
शपथ ग्रहण की तैयाारियों जोरों पर
महाराष्ट्र में 5 दिसंबर को होने वाले शपथ ग्रहण की तैयारियों जोरों पर चल रही है। इन्हीं तैयारियों को जायजा लेने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने आजाद मैदान पहुंचे। वहां उन्होंने पूरी व्यवस्था के की रूप रेखा देखी। उन्होंने तैयारियों को और तेज करने के लिए कहा है। इसकी निगरानी भी वह लगातार करते रहेंगे।
एकनाथ शिंदे ने कहा जनता चाहती है वह सीएम बनें

एकनाथ शिंदे ने अब खुलेतौर पर कहना शुरू कर दिया है कि जनता उनको सीएम के रूप में देखना चाहती है। शिंदे ने रविवार को इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा है, मैं आम लोगों के लिए काम करता हूं। मैं जनता का मुख्यमंत्री हूं। इसी वजह से लोग मानते हैं कि मुझे ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए।
अजीत पवार की अलग खिचड़ी पक रही है
पूरे मामले से परेशान होकर अजीत पवार दिल्ली रवाना हो गए है। माना जा रहा है कि अजीत नई खिचड़ी पकाने के मूढ़ में हैं। यदि एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल नहीं होत हैं तो बीजेपी अजीत पवार के साथ सरकार बना सकती है। ऐसे में अजीत की भूमिका क्या रहेगी इस संबंध में प्लान बी तैयार किया जा रहा है।
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बीजेपी का प्लान बी तैयार हो रहा है
एकनाथ शिंदे की नाराजगी यदि ऐसी ही जारी रहती है तो बीजेपी ने प्लान बी इसके लिए तैयार कर रही है। 2019 में भी ऐसी ही रस्साकशी स्थिति देखने को मिली थी। उद्धव ठाकरे सीएम पद के लिए अड़ गए थे और भाजपा ने उनकी जिद को सिरे से खारिज कर दिया था। ऐसी ही स्थिति एकनाथ शिंदे को लेकर बनी है।
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