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हमारे अवचेतन मन में रोगों को ठीक करने की अपार क्षमता छिपी है: डॉ सुधीर खेतावत

हमारा अवचेतन मन में रोगों को ठीक करने की अपार क्षमता वो शक्ति छिपी है: डॉ सुधीर खेतावत

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Published: 23, march, 2025

हमारे अवचेतन मन में रोगों को ठीक करने की अपार क्षमता छिपी है!

डॉ सुधीर खेतावत द्वारा सामूहिक ध्यान की अदभुत कार्यशाला जैन रत्नाकर साधु श्रेष्ठ पूज्य पारस मुनिश्री के सानिध्य में दिनांक 23 मार्च रविवार प्रातः 9 बजे से नौकार भवन तिलक नगर इंदौर में विशाल ओंकार ध्वनि ध्वनि के उच्चारण के साथ थ्री फिंगर विधि के अदभुत सामूहिक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

सूत्रधार हमारा अवचेतन मन में रोगों को ठीक करने की अपार क्षमता वो शक्ति छिपी है: डॉ सुधीर खेतावत ने सर्वप्रथम ओंकार ध्वनि के साथ उनके द्वारा विकसित थ्री फिंगर विधि का रोग निवारण में अवचेतन की शक्ति के बारे में विस्तृत प्रयोग द्वारा जानकारी दी।

इस विशाल निशुल्क शिविर में शहर के जैन समाज के अनेक प्रतिष्ठित लोगों के साथ अनेक मुनिश्री भी सम्मिलित हुए।

सर्वप्रथम मुनिश्री पारसजी ने ध्यान अवस्था में डॉ सुधीर खेतावत द्वारा विकसित थ्री फिंगर विधि से स्वयं को हुए कमर दर्द में लाभ के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, “हमारे अवचेतन मन में रोगों को ठीक करने की अपार क्षमता वो शक्ति छिपी है। यदि ओंकार ध्वनि के साथ डॉ खेतावत द्वारा आविष्कृत थ्री फिंगर विधि को आत्मसात कर लिया जाए तो हमारी ऐच्छिक क्रिया द्वार अनेऐच्छिक क्रियाओं के माध्यम से रोगों पर नियंत्रण एवं निवारण संभव है।”

डॉ खेतावत ने ओंकार ध्वनि के साथ सभी को सामूहिक थ्री फिंगर व अवचेतन मन की शक्ति का अनुभव कराया साथ ही विभिन्न रोगों में स्वयं त्वरित लाभ कैसे प्राप्त करें इसका प्रदर्शन करके बताया।

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तत्पश्चात अनेकों ने अपने अनुभव के बारे में बताते हुए अंगूठे को अंगुली से चिपकना व अंगूठे में तीव्र हो रही कम्पन के बारे में बताया। आश्चर्य की बात यह थी कि इस क्रिया से रोगग्रस्त स्थान पर हुई प्रतिक्रिया से अपने विभिन्न रोगों में हुए तत्काल लाभ के बारे में अपने अपने अनुभव बताए।

एक महिला ने 6 माह पुराने कंधे के दर्द में हुए पूर्ण लाभ के बारे में बताया। वहीं अन्य ने अपने माइग्रेन, कमर दर्द, घुटने का दर्द, भय, अनिद्रा व अन्य ने स्वयं में विकसित थ्री फिंगर विधि द्वारा हुए लाभ के बारे में सभी के समक्ष अपने अनुभव शेयर किए।

कार्यक्रम में अनेक जैन मुनिश्री व भरी संख्या में जैन समाज के लोग कार्यशाला में उपस्थित थे।

अंत में मुनिश्री पारसजी ने पीड़ित मानवता को समर्पित डॉ सुधीर खेतावत के कार्य की सराहना की व अन्यों को भी उनके अनुभवों का लाभ मिले इसके लिए भविष्य में अन्य कार्यशाला के आयोजन की घोषणा की।

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