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देउलगांव (शिरपुर) में दोबारा 2.25 करोड़ का धान घोटाला, जांच समिति ने खोली पोल

गढ़चिरौली, महाराष्ट्र | प्रतिनिधि: नरेश सहारे | 11 अप्रैल 2025

देउलगांव (शिरपुर) में दोबारा 2.25 करोड़ का धान घोटाला, जांच समिति ने खोली पो

पिछले साल भी 1.53 करोड़ रुपए का हुआ था घोटाला

कोरखेड़ा तहसील के देउलगांव (शिरपुर) स्थित धान खरीदी केंद्र एक बार फिर करोड़ों के घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। वर्ष 2023-24 में उजागर हुए 1 करोड़ 53 लाख 93 हजार रुपए के धान और बारदाना घोटाले के बाद इस वर्ष 2024-25 में भी 2 करोड़ 25 लाख रुपए से अधिक का नया घोटाला सामने आया है।

आदिवासी विकास महामंडल की जांच समिति ने क्षेत्रीय प्रबंधक संभारे को सौंपी रिपोर्ट में बताया है कि धान खरीदी में 6,140 क्विंटल धान और 13,514 क्विंटल बारदाना का घपला किया गया है, जिसकी कुल कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपए है। इस रिपोर्ट को 11 अप्रैल को जिला कलेक्टर अविशांत पंडा को भेजा गया है।

जिला कलेक्टर ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर दो दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, जबकि महामंडल की प्रबंध संचालक लीना बंसोड़ ने 9 अप्रैल को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन अब तक मामला दर्ज नहीं किया गया है।

घोटालेबाजों की वकील तलाश चालू

देउलगांव शिरपुर का यह मामला राज्य भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, घोटाले में लिप्त अधिकारी अब खुद को कानूनी गिरफ्त से बचाने के लिए वकीलों की मदद लेने में जुटे हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कुरखेड़ा के उप क्षेत्रीय प्रबंधक मुरलीधर बावने भी इस जाल में फंसेंगे?

बयानबाज़ी से बढ़ी बावने की मुश्किलें

धान खरीदी केंद्र प्रमुख मेश्राम ने उप क्षेत्रीय प्रबंधक मुरलीधर बावने पर मारपीट का आरोप लगाया है, जिससे बावने की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बावने पहले भी कोटलावार घोटाले में निलंबित हो चुके हैं और वर्तमान में उन्हें क्षेत्रीय प्रबंधक का प्रभार सौंपा गया है।

बावने पर विधानसभा चुनाव के दौरान एक राष्ट्रीय पार्टी के प्रत्याशी को लाखों का चंदा देने के आरोप भी हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में भी हलचल है। सूत्रों के अनुसार, उनके मंत्रालय तक संपर्क होने की बात कही जा रही है।

प्रबंध संचालक की चिट्ठी में सवालों की बौछार

लीना बंसोड़ द्वारा भेजे गए पत्र में बावने से सवाल किया गया है कि 2023-24 के धान स्टॉक का पंचनामा क्यों नहीं किया गया? क्यों खरीदी गई मात्रा का शून्य आंकड़ा दर्ज किया गया? निरीक्षण के दौरान उपस्थित क्यों नहीं रहे?

पत्र में यह भी उल्लेख है कि बावने अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे हैं, जबकि उन्हें अपने कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों की पूरी जानकारी थी।

जवाब नहीं, कार्रवाई की दरकार

बावजूद इसके, प्रबंध संचालक लीना बंसोड़ द्वारा अब तक किसी आरोपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई न किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह घोटाला भी पुरानी फाइलों में दफ्न हो जाएगा या किसी बड़ी कार्रवाई का गवाह बनेगा—इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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