By जालना से कुंवरचन्द मंडले तथा छत्रपति संभाजी नगर से निलेश भारती
Published: march 07, 2025, 03:34 PM
Brutality in Jalna: People angry at him for entering the temple beat the young man with iron rods
जालना। महाराष्ट्र के जालना जिले के अनोवा गांव में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। धर्म के नाम पर एक युवक के साथ अमानवीय अत्याचार किए गए, जो यह दर्शाता है कि समाज में कुछ लोग खुद को धर्म का ठेकेदार समझने लगे हैं और न्याय के नाम पर पाशविक कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं।
शिव मंदिर में प्रवेश का क्रूर दंड
कैलाश बोराडे नामक युवक को सिर्फ इसलिए भयावह यातना दी गई क्योंकि वह शिव मंदिर में गया था। आरोपियों ने उसे यह कहते हुए पकड़ लिया कि “तू मंदिर में क्यों घुस रहा है?” और फिर उसके नंगे शरीर पर तपती हुई सलाखों से क्रूरता से दागा। आग में तपती सलाखों से जलाया जाना किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। यह युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल छत्रपति संभाजी नगर के गवर्नमेंट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
जातीय विद्वेष की झलक?
जब इस घटना का वीडियो सामने आया तो यह स्पष्ट हुआ कि मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और जातिगत विद्वेष से भी जुड़ा हुआ हो सकता है। यह अमानवीय कृत्या सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब तक समाज में जाति के नाम पर अत्याचार किए जाते रहेंगे? क्या इंसानियत की कोई कीमत नहीं बची?
सरकार का सख्त रुख
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और साफ कहा है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिसने भी इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन वीडियो में दिख रहे अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। एकनाथ शिंदे ने पुलिस को निर्देश दिया है कि इस कृत्य में शामिल हर व्यक्ति को हिरासत में लिया जाए और न्याय सुनिश्चित किया जाए।
समाज में बढ़ता कट्टरता का साया
यह घटना केवल एक युवक पर अत्याचार भर नहीं है, बल्कि यह उस विकृत मानसिकता का प्रतिबिंब है, जो समाज में धीरे-धीरे पैर पसार रही है। कुछ लोग खुद को धर्म का ठेकेदार मानकर दूसरों पर अत्याचार कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि कौन सा धर्म किसी निर्दोष को इस तरह जलाने की इजाजत देता है? क्या धर्म का अर्थ केवल भय और दमन बनकर रह गया है?
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इतनी बर्बरता की हिम्मत कहां से आ रही है?
इतनी बर्बरता उस व्यक्ति के साथ करने का अधिकार आखिर किसने दिया? शास्त्रों के अनुसार, शिवशंकर शम्भु दीन-हीन, शोषित, पीड़ित और लाचारों को अपने प्रेम से सरोबार करते हैं, इसीलिए उन्हें ‘दीनानाथ’ कहा जाता है। शिव, जो संहारक होकर भी करुणा और कृपा के प्रतीक हैं, क्या कभी अपने किसी भक्त को इस तरह के क्रूर व्यवहार की अनुमति दे सकते हैं? News First का स्पष्ट मत है कि इस तरह का नीच और अधम कृत्य करने वाले लोग एक रत्ती भर भी धार्मिक नहीं हो सकते। यह धार्मिकता नहीं, बल्कि धर्म की आड़ में छिपी पाशविक मानसिकता का चरम है।
इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है। क्या हम ऐसे समाज की कल्पना कर सकते हैं, जहां कुछ लोग यह तय करें कि कौन किस मंदिर में जा सकता है और कौन नहीं? धर्म को हथियार बनाकर अत्याचार करने वाले असल में मानवता के सबसे बड़े दुश्मन हैं।











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