बुलढाणा-वसीम शेख अनवर
नवाबों के जमाने की झलक
कभी नवाबों और रजवाड़ों का दौर था जब दरबार सुबह नहीं बल्कि दोपहर में सजता था। आम जनता, कार्यकर्ता और दरबारी घंटों बाहर खड़े रहकर इंतजार करते थे। ठीक वैसा ही नजारा आज बुलढाणा में देखने को मिला, जब महाराष्ट्र सरकार के पालक मंत्री मकरंद पाटील ने जनता को घंटों इंतजार करवाया।
सुबह से इंतजार, दोपहर तक नाकामी
शनिवार सुबह 11 बजे से ही किसान, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, विभिन्न दलों के नेता और कार्यकर्ता बुलढाणा स्थित शासकीय विश्रामगृह पहुंचे थे। उम्मीद थी कि मंत्री जी जल्दी ही मिलेंगे।
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11 बजे से 12 बजे तक इंतजार
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12 से 1 बजे तक भी न निकले
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1:30 बज गए, फिर भी कोई अता-पता नहीं
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आखिरकार 2 बजे तक पालक मंत्री अपने वीआईपी सूट से बाहर ही नहीं आए।
किसानों की उम्मीद टूटी
जिले में इन दिनों अतिवृष्टि और हुमणी इल्ली का कहर है।
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खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं
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किसान कर्ज और संकट से जूझ रहे हैं
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राहत और मदद की आस में वे मंत्री से मिलने पहुंचे थे
लेकिन घंटों खड़े रहने और इंतजार करने के बाद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। किसान संगठनों का कहना है कि यह किसानों के साथ सरासर अन्याय है।
जनता और कार्यकर्ता भी निराश
केवल किसान ही नहीं, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता भी मंत्री से मुलाकात करने पहुंचे थे।
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कुछ लोग आसपास के कमरों में बैठे रहे
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कई लोग बाहर खड़े होकर प्रतीक्षा करते रहे
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अंत में सभी थक-हारकर निराश लौट गए
सवालों के घेरे में पालक मंत्री
महाराष्ट्र की डबल इंजन सरकार के मंत्री होने के बावजूद मकरंद पाटील का यह रवैया जनता को नागवार गुजरा। अब सवाल उठने लगे हैं:
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क्या मंत्री जनता की समस्याओं से कट चुके हैं?
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क्या जनता और किसानों से दूरी बनाना ही नई राजनीति है?
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क्या मकरंद पाटील सचमुच फडणवीस सरकार के नए “नवाबजादे” बन गए हैं?











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